देखिए असर: CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के कारण पिछले 2 सप्ताह में 2 लाख पर्यटकों ने ताजमहल का टूर रद्द किया

देखिए असर: CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के कारण पिछले 2 सप्ताह में 2 लाख पर्यटकों ने ताजमहल का टूर रद्द किया

नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर सारा देश उबल रहा है। नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध के कारण देश पर बुरा असर पड़ रहा है। इन प्रदर्शनों के कारण देश के राज्यों के पर्यटन स्थलों पर दिसंबर माह में 90 फीसदी तक कम पर्यटक पहुंचे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अकेले दिसंबर माह में 2 लाख से ज्यादा देशी और विदेशी पर्यटकों ने अपना ताजमहल का टूर रद्द कर दिया है।

मोबाईल रॉयटर्स डॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल दिसंबर महीने में ताजमहल देखने के लिए 40 फीसदी पर्यटक ही पहुंचे हैं। और इसी कारण के चलते यहां के होटल, रिसोर्ट और गेस्ट हाउस खाली पड़े हैं। वही हजारो गाइडो पर भी इनका सीधा असर पड़ा है। ताजनगरी में पर्यटन सीजन में इस बार 10 साल का रिकार्ड टूट गया है।

ताजमहल पर पर्यटक

दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून के प्रदर्शनों के दौरान आगरा में इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से विदेशों में नकारात्मक मैसेज पहुंचा है। पर्यटन उद्योग पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। वही दिसंबर महीने में भी धड़ाधड़ बुकिंग कैंसिल हुईं। यह आंकड़ा 40 फीसदी को पार कर गया। जनवरी में भी सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में नये साल के जश्न के कार्यक्रम भी पूरी तरह रद्द हो गए है।

बता दें वर्ष 2016 में नोटबंदी के बाद पर्यटन का ग्राफ गिरता गया। वर्ष 2017 से हालात थोड़े सुधरे। लेकिन इस बार कश्मीर मामले के बाद नवंबर में अयोध्या का फैसला और इसके बाद नागरिकता कानून को लेकर बवाल शुरू हो गए। राजधानी दिल्ली में हुए बवाल के बाद विदेशी पर्यटकों ने बुकिंग बड़े पैमाने पर कैंसिल करवाईं है।

CAA और NRC का सबसे ज्यादा विरोध असम और दिल्ली में हो रहा है। इस कारण असम जाने वाले पर्यटकों की संख्या में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। असम पर्यटन विकास निगम के प्रमुख जयंत मल्ला बरुआ का कहना है कि असम में हर साल दिसंबर में करीब 5 लाख पर्यटक पहुंचते थे, लेकिन इस बार प्रदर्शनों के कारण कई देशों की ओर से जारी की गई ट्रैवल एडवाइजरी के कारण इस साल 90 फीसदी कम पर्यटक पहुंचे हैं।

वही कर्नाटक के चीनी जिले के रूप में मशहूर मांड्या जिले में भी विरोध प्रदर्शनों के कारण पर्यटक नहीं जा हैं। जिले में 100 से ज्यादा प्रमुख पर्यटन स्थल हैं जहां पर हर साल 12 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन प्रदर्शन के दौरान पर्यटकों की संख्या में भीरी कमी आई है।

अगर बात की जाये देसी पर्यटकों की तो देसी पर्यटकों में कमी का कारण मंदी का असर माना जा रहा है। देसी पर्यटकों में भी चालीस से पचास फीसदी तक की गिरावट आई है। और इसी कारण इस दफा न्यू ईयर के सेलीब्रेशन भी फीका रहेगा।

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