22 मुस्लिम लड़कियों ने पास की नीट (NEET) परीक्षा, लेकिन कॉलेजों में एडमीशन लेने में रोड़ा अटक रहा है, जानिए क्या है पूरा मामला

22 होनहार मुस्लिम लड़कियों ने इस कठिन (NEET) परीक्षा को पास तो कर लिया, लेकिन इनके आगे बढ़ने का सपना शायद अधूरा रह जायेगा

अक्सर जीव विज्ञान और मैथमेटिक्स की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का सपना होता है कि डॉक्टर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाएं लेकिन उनमें से कुछ ही विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो डॉक्टर और इंजीनियर के लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं. लेकिन क्या हो अगर आप लक्ष्य के बहुत करीब हों और फिर भी कामयाबी ना छू पाएं।

ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है जब कुछ छात्राओं ने NEET जैसी कठिन परीक्षा तो पास कर ली लेकिन फिर भी वे उच्च चिकित्सा संस्थान में प्रवेश नहीं ले पा रही है. बता दें कि दिल्ली के जामिया नगर में रहने वाली 23 मुस्लिम छात्रााओं ने NEET जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली।

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NEET देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की परीक्षा होती है जिसके बाद विद्यार्थी देश के उच्चतर मेडिकल संस्थानों में प्रवेश पा सकता है. लेकिन ये छात्राएं परीक्षा पास करने के बावजूद भी इन मेडिकल संस्थानों में प्रवेश नहीं पा सकती।

मेडिकल मिरर की एक ख़बर के अनुसार नीट परीक्षा पास करने के बावजूद भी यह छात्राएं सरकारी संस्थानों में प्रवेश नहीं पा सकेंगी. इसका कारण है कि छात्राओं के अंक कॉलेजों द्वारा जारी किए गए कटऑफ से कम है ऐसे में यह छात्राएं सरकारी संस्थानों में प्रवेश के लिए योग्य नहीं है हालांकि ये छात्राएं प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले सकती हैं।

सभी ने सरकारी विद्यालयों में की है पढ़ाई

नीट परीक्षा पास करने वाली ये 23 छात्राएं दिल्ली के सरकारी स्कूलों से पढ़ी हुई हैं। आपको बता दें कि इन सभी छात्राओं का नामांकन दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय नूर नगर ओखला में है।

आपको बता दें कि साल 2020 में हुई नीट परीक्षा में दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में पढ़े 569 छात्रों ने जगह बनाई उन्हीं में से ये 23 मुस्लिम छात्राएं है जो कि अब सरकारी कॉलेजों में प्रवेश लेने में असमर्थ हैं।

गौरतलब है कि नीट परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली के मंत्रियों ने नीट क्वालीफायर विद्यार्थियों की प्रशंसा की थी तथा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तो खासतौर से नूर नगर विद्यालय का उल्लेख किया था लेकिन अब विद्यार्थियों का भविष्य अधर लटका हुआ है।

आर्थिक स्थिति है खराब

दिल्ली के सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं ने नीट परीक्षा तो पास कर ली लेकिन अब उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है। ये सभी छात्राएं कॉलेजों के कट ऑफ की वजह से सरकारी संस्थानों में प्रवेश नहीं कर पाएंगी।

ऐसे में छात्राओं के पास सिर्फ निजी संस्थानों का विकल्प बचता है लेकिन निजी संस्थानों की फीस बहुत ज्यादा होती है। छात्राओं में से एक मदीहा कहती हैं कि “हम मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं हम निजी संस्थानों की फीस कैसे दे पाएंगे।

बैंक भी करता है छात्रों की मदद

बता दें कि देशभर के मेडिकल संस्थान में प्रवेश पाने के लिए होने वाली नीट की परीक्षा देश की कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है ऐसे में नीट की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों की फीस भी खूब होती है लेकिन सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र इन कोचिंग संस्थानों का हिस्सा नहीं बन पाते

ऐसे में जामिया सहकारी बैंक इन छात्रों की मदद भी करता है। बता दें कि जामिया सहकारी बैंक ने हाल ही में टॉप टेन छात्रों का चयन कर एक छात्र के लिए 40000 रुपये तक की फीस का भुगतान किया है।

अगर छात्रों की बात करें तो शिजा अली, बुशरा मिडहट और अरीबा और दीबा अली वे छात्र हैं जिन्होंने बैंक की सहायता से कोचिंग संस्थान आकाश इंस्टीट्यूट में प्रवेश पा लिया है। वहीं विद्यालय की पूर्व प्रिंसिपल डॉ शबाना नाजिम भी विद्यार्थियों की मदद करती है उन्होंने भी दो छात्रों की वित्तीय सहायता कर आकाश इंस्टीट्यूट में प्रवेश दिलाया है।