राम मंदिर निर्माण में आई बड़ी अड़चन, देश के जाने माने आईआईटी विशेषज्ञों को बुलाया गया

अयोध्या: राम जन्‍मभूमि ट्रस्‍ट के महासचिव चंपत राय ने कहा- किसी ने कल्‍पना नहीं की थी कि भगवान का जहां गर्भगृह बन रहा है, वहां की जमीन खोखली निकलेगी, ठोस नहीं है।

बरसों से चले आ रहा राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवा’द सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आखिर खत्म हो गया है। जिसमें वि’वा’दित जमीन को हिंदू पक्ष के लिए मंदिर निर्माण के लिए दिया गया वही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को अयोध्या में 5 एकड़ भूमि देना का आदेश दिया था जिसके बाद राज्य सरकार ने अयोध्या से 30 किलोमीटर दूर धनीपुर गांव में 5 एकड़ जमीन दी गई।

एक ओर जहां बीते साल 5 अगस्त को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का आयोजन किया गया वहीं मस्जिद निर्माण के लिए हाल ही में मस्जिद के नक्शे का ब्लूप्रिंट सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किया गया वही अब मंदिर निर्माण को लेकर एक बड़ी समस्या आ खड़ी हुई है जिसके बाद मंदिर के निर्माण पर विराम लग गया है।

मंदिर के नीचे 200 फीट तक है बालू और पानी

ayodhya ram mandir

बता दें कि हाल ही में मंदिर निर्माण का कार्य रुक गया है। जिसके बाद एक बार फिर मंदिर निर्माण को लेकर चिंता होने लगी है। जानकारी के अनुसार जहां पर राम मंदिर का निर्माण होना है वहां 200 फीट नीचे तक सिर्फ बालू ही मिल रही है यही नहीं मंदिर में मौजूद गर्भ ग्रह से थोड़ी दूर ही जमीन के नीचे सरयू नदी का एक बड़ा प्रवाह मिला है।

ऐसे में अब मंदिर के नींव भरने का कार्य रुक गया है और यह चिंता सता रही है कि बालू और पानी के रहते मंदिर की नींव कैसे रखी जा सकती है। वही इस मामले पर राम जन्म भूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बताते हैं कि “किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की होगी कि जहां भगवान का गर्भगृह बना है उसके नीचे जमीन खोखली है।

उन्होंने आगे कहा की सरयू नदी हालांकि मंदिर से दूर बहती हैं लेकिन उसकी धारा वहां आ रही है जहां गर्भ ग्रह स्थापित है। ऐसे में अब मंदिर निर्माण को लेकर एक बड़ी समस्या आ खड़ी हो गई है।

IIT बताएंगी उपाय

गर्भ गृह के आसपास बालू और सरयू की धारा मिलने पर राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास कहते हैं कि “इंजीनियर चाहते थे कि नींव 100 फीट नीचे से उठाई जाए लेकिन 100 फीट नीचे बालू और सरयू का प्रवाह मिला है जिससे कहा जा सकता है कि उस जगह पर प्राचीन सरयू की धारा थी ऐसे में अगर वहां से नींव उठाई जाए तो उसके धंसने की आशंका है।

मंदिर निर्माण में आने वाली चुनौती के लिए अब देश की आईआईटी को उपाय बताने के लिए कहा गया है। बता दें कि बालू और पानी के चलते नींव रखना बहुत मुश्किल भरा हो सकता है।

ऐसे में ट्रस्ट चाहता है कि देश की आईआईटी बताएं कि वहां पर बालू और पानी के चलते हजारों साल तक चलने वाले मंदिर की नींव कैसे रखी जा सकती है। इसके लिए आईआईटी दिल्ली आईआईटी मुंबई आईआईटी चेन्नई आईआईटी गुवाहाटी CBRIरुड़की और लार्सन और ट्रुबो सहित टाटा के इंजीनियर लगाये गए हैं।

आपको बता दें कि बनने वाला राम मंदिर 3 मंजिल का होगा जिसमें हर मंजिल की ऊंचाई 20 फीट की होगी और इसकी लंबाई तक़रीबन 360 और चौड़ाई 335 फीट होगी वहीं शिखर 161 फ़ीट पर होगा।