लड़की के साथ बात करने, फ्री डेटा, और LED टीवी जीतने के नाम पर लोग Missed Call कर रहे हैं?

लड़की के साथ बात करने, फ्री डेटा, और LED टीवी जीतने के नाम पर लोग Missed Call कर रहे हैं?

शायद आपको ध्यान होगा कि जब मोबाइल सर्विस काफी महंगी थी, और एक वक्त तो ऐसा था कि इनकमिंग कॉल तक का पैसा लगता था. फिर अंबानी ने मोबाइल की दुनिया में कदम रखा, तो हर हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया. इसके बाद मोबाइल के क्षेत्र में क्रांति ई और इनकमिंग कॉल पर से चार्ज हटा दिए गए. अब सिर्फ आउटगोइंग कॉल का ही पैसा देना होता है.

दोस्तों यह उस वक्त की बात है, जब एक आउटगोइंग कॉल प्रति मिनट पर 2 से 3 रुपए के लगभग लगते थे. इसके बाद यह धीरे-धीरे कम होता चला गया. वो एक दौर था जब लोग अक्सर मिस कॉल मिस कॉल खेला करते थे. खासतौर से जो युवा पीढ़ी थी वो इसमें ज्यादा मशगूल थी.

जवानी के जोश में युवाओं की जब गर्लफ्रेंड अपने अपने प्रेमियों को मिस कॉल मार दिया करती थीं, जिसके बाद वह जल्दी से पलट कर उनको कॉल करते थे. समय बीतता गया और इसके बाद दौर आया इन्टरनेट का. यहाँ अब सोशल मीडिया पर क्रांति होती है.

आप कुछ भी कर रहे हों वो सब सोशल मीडिया पर दिखाने की होड़ सी लगी हुयी है, किसी को दान देना, कहीं घूमने जाना, मंदिर या मस्जिद या फिर किसी दरगाह के दर्शन, किसी को कोसना, किसी के प्यार में पड़ना, हगना, मूतना आपका सब कुछ फेसबुक और ट्विटर पर लोगों को नज़र आता है.

इस बात का सबसे ज्यादा फायदा उठाया देश की पॉलिटिकल पार्टियों ने और बड़ी-बड़ी कंपनियों ने. जिन्हें अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए लोगों की भीड़ चाहिए थी. वो थी सोशल मीडिया पर. फिर ऐसा सिस्टम निकाला कोई भी कंपनी या पार्टी मिस कॉल के जरिए अपने फेवर में वोट करवा कर अपने बड़े हुए आंकड़े लोगों को दिखाने लगी.

आपको बता दें कि जो लोग लड़की के साथ धिन्चक करने, या फ्री देता पाने या कोई लाटरी जीतने के चक्कर में मिस कॉल के झांसे में आ रहे हैं. वह नुबेर भारतीय जनता पार्टी ने जारी किया है जिस पर आप मिस कॉल करते ही नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन मैं अपना सहमति में समर्थन दे देते हैं.

इससे पहले भी बीजेपी ने मिस कॉल के जरिए लाखों मेंबर सोशल मीडिया के जरिए जोड़े थे. हालांकि अभी तक यह फार्मूला पूरी तरह से फेल रहा है, सोशल मीडिया पर किसी से एक लाइक दबवा कर या मिस्ड कॉल दिलवाकर आप उसको पूरी तरह से अपने पक्ष में नहीं कर सकते. वोटर की असली सहमति और असहमति का पता आपको इलेक्शन के वक़्त ही पता चलता है.

सोशल मीडिया पर किसी महंगी और खूबसूरत चीज़ को लाइक करने का मतलब यह नहीं है कि आप उसे खरीद ही लेंगे.

अब बात करते हैं नागरिकता संशोधन कानून पर बीजेपी द्वारा जारी किए गए एक नंबर की ये नंबर है “8866288662” जिस पर मिस कॉल देने से आप नागरिकता कानून पर अपना समर्थन दे देते हैं.

सोशल मीडिया पर यह नंबर अलग-अलग दावों के साथ पेश किया जा रहा है, जिसमें ट्विटर और फेसबुक जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी पोस्टों से भरे हुए पड़े हैं.

कई पोस्ट तो ऐसी हैं जिसमें आपको अपनी और आकर्षित करती हुई लुभावनी खूबसूरत लड़की अपना नंबर देती हुई कहती है कि अगर आप मुझसे बात करना चाहते हैं तो इस नंबर पर मिस कॉल मारिये में पलट कर आपसे बात करूंगी.

इसके अलावा इस नंबर के बारे में ऐसा दावा भी किया जा रहा है कि इस नंबर को किसी हैकर ने बनाया है. जैसे ही आप इस नंबर पर मिस कॉल देते हैं तब आपके मोबाइल के सारे फोटो और वीडियो और आपकी बैंक डिटेल्स या सारा डाटा उस हैकर के पास पहुंच जायेगा.

इसलिए इस नंबर पर मिस कॉल ना मारे, ऐसे दावों के साथ यह पोस्ट दबाकर शेयर की जा रही है.

दोस्तों दरअसल पॉलिटिकल पार्टियों के आईटी सेल चलाने वाले लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत देश का पढ़ा लिखा बुद्धिजीवी वर्ग कितना ज्यादा बड़ा बेवकूफ है. क्योंकि यह एक बार नहीं अब तक हजारों बार आपको इसी सोशल मीडिया के जरिए झांसे में लेते हुए न जाने कितने काम करवा चुके हैं.

ऐसा ही इस नंबर के साथ हो रहा है. जिसमें एक तरफ आपको अलग-अलग झांसे देकर मिस कॉल करने के लिए कहा जा रहा है. तो दूसरी तरफ इस नंबर पर मिस कॉल ना करने के लिए आपको अलग-अलग कंटेंट परोसा जा रहा है.

क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी पॉलिटिकल पार्टी ने देश के जरूरी मुद्दों जैसे कि इंसान की रोजमर्रा की जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली व्यवस्था, पानी की व्यवस्था आपके ट्रांसपोर्टेशन या और भी आपकी दैनिक जरूरतों को लेकर इस तरह का कोई सर्वे करवाया है?.

शायद नहीं और लगता है कि न ही कभी आगे किया जाएगा. देश की पॉलिटिकल पार्टियां लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं. लिहाजा समझदार लोगों को इनसे बचने की जरूरत है. हैरत की बात तो तब होती है जब एक से एक बड़े पढ़े लिखे लोग इनके झांसे में आ जाते हैं.

सोशल मीडिया पर ऐसे फिजूल बकवास से बचें और किसी भी तरह का मैसेज फॉरवर्ड करने से पहले उसकी छानबीन ज़रूर कर लें.  बेहतर होगा अपना खाली समय अपने काम में लगाएं.

ट्विटर और फेसबुक एक ऐसा न’शा है जिसमें हमारे देश का एक बड़ा वर्ग उलझा हुआ है, और वह अपने कीमती समय का इस्तेमाल अपने ज़रूरी कामों में करने की जगह इनमें उलझा हुआ है.

आपका कीमती वक्त जो आपके जीवन को बेहतर बनाने के लिए होता है वह भी आप सोशल मीडिया के चक्कर में पड़कर खो देते हैं आपको यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बीता वक्त हाथ नहीं आता आज जो आपके हाथ से निकल गया वह कल नहीं आएगा.

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