गोडसे की अस्थियां 1949 से आज भी इस रियल एस्टेट कंपनी के पास क्यों रखी हुई हैं, जाने इसका कारण

भारत को अंग्रेजों से आज़ादी मिल चुकी थी और देश में संविधान निर्माण का दौर चल रहा था. ऐसे समय में 30 जनवरी 1948 का दिन भारतीय इतिहास का सबसे बुरा दिन कहा जा सकता है. इस दिन नाथूराम गोडसे नाम के एक सख्स के द्वारा महात्मा गांधी को गोली मा$र दी गई थी. इस घटना के पुरे देश में सनसनी फैला दी थी. नाथूराम गोडसे को इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया था वहीं उनके साथ उसके पांच अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया गया था.

अदालत में सुनवाई के दौरान गोडसे ने अपना बयान भी दर्ज करवाया था. उसने बताया था कि गांधी को मा$रने के पीछे की मुख्य वजह यह थी कि वह भारत पाकिस्तान के विभाजन से खुश नहीं था. कोर्ट में गांधी ह$त्या के मामले में एक साल तक सुनवाई चली इसके बाद गोडसे को फांसी की सजा दे दी गई.

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नाथूराम गोडसे की भतीजी हिमानी सावरकर कहती है कि हमें उस समय बहुत बुरा लगता है जब लोग नाथूराम गोडसे को इतिहास की किताबों में सिरफिरा कहते है जबकि सच यह है कि उन्होंने गांधी जी की ह$त्या अपने पुरे होश हवास में की थी.

घटना के समय नाथूराम ने यही कपड़े पहने हुए थे

जिस समय गोडसे ने गांधी जी को मा$रा था तब वह दैनिक अग्रणी नाम के एक पत्र का संपादक थे जो बाद में हिंदू राष्ट्र के नाम से जाना जाने लगा था. आपको जानकर हैरानी होगी कि नाथूराम गोडसे की अस्थियां को आज तक विसर्जित नही किया गया है.

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दरअसल गोडसे परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा के चलते उनकी अस्थ्तियों को अभी तक चांदी के एक कलश में सुरक्षित रख रखा है. हिमानी कहती है कि उन्होंने पहले ही लिख दिया था कि मेरे शरीर के कुछ हिस्सों को संभाल के रखा जाए

और जब सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में फिर से समाहित हो जाए और एक बार फिर से अखंड भारत का निर्माण हो जाए. तब उसमें मेरी अस्थियां प्रवाहित की जाए. फिर चाहे इसमें दो-चार पीढ़ियाँ भी लग जाएं तो कोई बात नहीं.