मोदी सरकार के अच्छे कामो को भुला याद रही गोरक्षकों की हिंसा: लेखिका तवलीन सिंह

जयापुर गांव देखने गई पिछले हफ्ते. यह वही गांव है, जिसे नरेंद्र मोदी ने गोद लिया था बनारस का सांसद बनने के बाद आदर्श गांव बनाने के वास्ते. बनारस से जयापुर तक मुझे एक घंटा लगा। रास्ते में इतने सारे गंदे, बेहाल गांव दिखे कि जयापुर में परिवर्तन और विकास दिखने की उम्मीद टूट गई. वहां पहली बार गई थी 2017 में। उस वक्त परिवर्तन के नाम पर सिर्फ यह दिखा गांव में दाखिल होते ही कि एक नया बैंक खुल गया था और गांव की कच्ची, टूटी सड़क को पक्की करने का काम शुरू हो गया था.

अब सड़क बन गई है और दूसरा बैंक भी खुल गया है. पक्की सड़क गांव के अंदर तक जाती है, लेकिन प्रधान श्रीनारायण पटेल के घर तक पहुंचने के लिए मुझे एक कच्ची सड़क पर उतरना पड़ा. प्रधान अपनी दोमंजिला कोठी के सामने बैठे हुए थे. उन्होंने बताया कि गांव में अकसरियत भूमिहार और पटेलों की है और कोई पांच सौ पैंतीस घर हैं यहां.

मैंने जब पूछा कि परिवर्तन और विकास के नाम पर क्या कुछ हुआ है. जबसे मोदी ने जयापुर को गोद लिया है, तो उन्होंने कहा कि पूरी तरह बदल गया है गांव. दो बैंक आ गए हैं, एक पोस्ट ऑफिस आ गया है, घरों में पानी पहुंच गया है, स्कूल बन गया है और बिजली अब दिन में बाईस घंटा रहती है.

मैंने जब उनसे पूछा कि क्या वे पूरी तरह संतुष्ट हैं गांव के विकास से, तो उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा अनंत होती है, तो अब हम चाहते हैं कि गांव की गलियां भी पक्की कर दी जाएं. प्रधान से मिलने के बाद मैं गांव के अन्य लोगों से मिली और जिनसे भी बातें हुईं सबने कहा हर हर मोदी, घर घर मोदी.

पिछले दिनों मैंने अपनी चुनावी यात्राओं में कई गांवों में रुक कर लोगों से बातें की हैं. अन्य राज्यों में उनमें अक्सर मोदी की प्रशंसा सुनने को मिली है. लेकिन शहरों में तस्वीर अलग है. छोटे कारोबारी और दुकानदार जो कभी मोदी के सबसे बड़े प्रशंसक हुआ करते थे अभी तक झेल रहे हैं नोटबंदी और जीएसटी से हुआ नुकसान.

मोदी के दौर में उनको नुकसान इतना हुआ है कि प्रशंसा करने की उनमें हिम्मत नहीं रही है लेकिन मोदी को फिर से वोट देने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि उनको विकल्प नहीं नजर आता है कोई. एक दुकानदार के शब्दों में मैं जब देखता हूं उन नेताओं की तरफ जो गधबंधन में हैं या राहुल गांधी की तरफ तो मैं सोचता हूं कि भाई इनमें से अगर कोई बन जाता है प्रधानमंत्री, तो देश तबाह हो जाएगा.

सो, मजबूरी में शायद मोदी को ही वोट देना पड़ेगा एक बार फिर. भारत के मतदाताओं का एक वर्ग है लेकिन जो किसी हाल में मोदी को वोट नहीं देने वाला है और वह हैं मुसलमान. पिछली बार उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में अगर मुसलमानों ने अपना वोट न दिया होता मोदी को, तो शायद पूर्ण बहुमत नहीं मिलता.

लेकिन पिछले पांच वर्षों में मुसलमानों ने गोरक्षकों का जुल्म भी देखा है और यह भी देखा है कि गऊ माता के नाम पर वही कारोबार बंद हुए हैं, जिनमें मुसलमान काम करते थे. उत्तर प्रदेश के जब से मुख्यमंत्री बने हैं योगी आदित्यनाथ, तब से चमड़ा उद्योग तकरीबन बंद हो गया है.

पशुपालन खतरे में है और अवैध बूचड़खानों की मुहिम जबसे चली है. जायज गोश्त की दुकानें भी बंद हो गई हैं. ऊपर से नफरत इतनी फैल गई है कि मुसलिम समाज ने तय कर लिया है कि मोदी अगर फिर से बनते हैं प्रधानमंत्री तो हिंदू राष्ट्र बना कर रहेंगे जिसमें उनके लिए जगह तक नहीं होगी.

हाल में दिए गए एक टीवी इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि उन्होंने जो भी कुछ किया है बतौर प्रधानमंत्री, कभी यह देख कर नहीं किया है कि भला किस कौम का होता है. उन्होंने कहा कि जब किसी गांव में सड़कें बनी हैं या बिजली पहुंचाई गई है, तो उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि इससे मुसलमानों के लिए फायदा होगा कि नहीं.

याद दिलाया कि जब सच्चर आयोग गुजरात आया था और उनसे पूछा गया कि मुसलमानों के लिए क्या किया है, तो उनका जवाब था कि मैंने कुछ नहीं किया है मुसलमानों के लिए और हिंदुओं के लिए भी कुछ नहीं किया है. मैंने जो भी किया है गुजरातियों के लिए किया है.

यह जवाब शायद वाजिब भी रहा होगा, तब वे मुख्यमंत्री थे एक राज्य के, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उनको बहुत कुछ और करना चाहिए था. मोहम्मद अखलाक की ह’त्या के बाद अगर मोदी ने इशारा किया होता गोरक्षकों को कि वे ऐसी हिं’सा बिलकुल बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं तो ऐसी घिनौनी घटनाएं शायद उसी समय बंद हो गई होतीं.

मोदी ने चुप रह कर अपना ही नुकसान किया है, इसलिए कि विकास के नाम पर बहुत कुछ करने के बाद भी कलंक-सा लगा रहा है उनकी सरकार के माथे पर जो उनके अच्छे कार्यों को भुला देता है. न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे महत्त्वपूर्ण विदेशी अखबार जब भी इस चुनाव के बारे में कुछ छापते हैं तो हमेशा सावधान करते हैं कि मोदी अगर दुबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो संभव है कि भारत में हिंदू राष्ट्र स्थापित हो जाएगा.

जिसमें मुसलमानों के लिए जगह नहीं रहेगी. सो मोदी के दौर में जो अच्छे काम हुए हैं उनको भुला दिया जाता है और याद रहती है सिर्फ इस दौर में गोरक्षकों की हिं’सा, जिसके कारण आज भी मुसलमान मारे जा रहे हैं. बदनाम मोदी भी हुए हैं, बदनाम भारत भी हुआ है.

तवलीन सिंह (यह लेखिका के निजी विचार हैं)