रामजन्म भूमि: खुदाई में मिले बौद्ध अवशेष मिलने का दावा, बौद्ध भिक्षुओं ने इन मांगों के साथ शुरू किया अनशन

अयोध्या में होने वाले राम मंदिर के निर्माण से पहले एक नया विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है. दरअसल रामजन्मभूमि पर मिले अवशेष बौद्ध धर्म से संबंधित होने के दावे किये जा रहे है. बौद्ध धर्म के अनुयायियों का दावा है कि यहां बौद्ध धर्म के लोगों का अधिकार है. इसे लेकर अयोध्या के जिलाधिकारी कार्यालय पर बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने अनशन भी शुरू कर दिया है. जिसके बाद अब एक नया विवाद खड़ा होने कि संभावनाएं जताई जा रही हैं.

समतलीकरण के दौरान श्री रामजन्मभूमि परिसर में मिल रही प्राचीन मूर्तियों और प्रतीक चिन्हों को लेकर विवाद खड़ा होने लगा है. बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा केंद्र और प्रदेश सरकार पर बौद्ध संस्कृति के अवशेषों को मिटाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं.

वहीं इसे लेकर अखिल भारतीय आजाद बौद्ध धम्म सेना ने मांग करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि की खुदाई में मिल रहे अवशेषों को सरकार संरक्षित करके रखे. संगठन ने दावा करते हुए कहा है कि राम जन्मभूमि परिसर में मिलने वाले मूर्तियां और प्रतीक चिन्हों बौद्ध कालीन है.

इसी मांग को लेकर अब दो वृद्ध बौद्धों जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनसन पर बैठ गए हैं. उनकी मांग है कि यूनेस्को के संरक्षण में राम जन्म भूमि परिसर की खुदाई की जाए और इसमें मिलने वाले अवशेष संरक्षित रखें जाए.

धरना देने के लिए बिहार से अयोध्या पहुंचे अखि‍ल भारतीय आजाद बौद्ध धम्म सेना संगठन के भंते बुद्धशरण केसरिया ने 13 जुलाई से अनशन शुरू कर दिया है. उन्होंने प्रचीन बुद्ध नगरी साकेत जिसे अब वर्तमान में अयोध्या कहा जाता है में चल रहे मंदिर निर्माण के कार्य को रोकने की मांग भी की हैं.

इस मामले को लेकर भंते बुद्धशरण केसरिया ने कहा कि अयोध्या में बन रहे राममंदिर के निर्माण के लिए किया जा रहा समतलीकरण के दौरान बौद्ध संस्कृति से जुड़ी कई साक्ष्य जैसे बहुत सारी मूर्तियां, कमल का फूल, अशोक धम्म चक्र और अन्य अवशेष प्राप्त हुए है.

जिनसे साफ होता है कि वर्तमान अयोध्या बोधि‍सत्व लोमश ऋषि‍ की बुद्ध नगरी साकेत रही हैं. केसरिया कहते हैं कि अयोध्या मामले को लेकर हिंदु मुस्लिम और बौद्ध तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी लेकिन कोर्ट ने सभी सबूतों को दरकिनार करते हुए हिंदुओं के पक्ष में एकतरफा फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि के लिए इसे दे दिया हैं.