कोराना: ट्रंप की धमकी मानना पड़ा महंगा, अब भारत में हो गई हाइड्रोक्लोरोक्वीन की कमी, देखिए रिपोर्ट

अमेरिकन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा भारत को हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा नहीं दिए जाने पर देख लेने की ध’मकी के बाद भारत ने आनन फानन में अपने निर्यात के नियमों में बदलाव तो कर दिया लेकिन संभव है कि आने वाले वक्त में भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ जाए क्योंकि भारत में तेजी से कोरोना पांव पसारता दिखाई दे रहा है.

आपको बता दें अमेरिका को हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा को निर्यात की मंजूरी दिए जाने के बाद राजस्थान सरकार को 300 एमजी हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवाई के पूरे स्टॉक को वापस करने पर मजबूर होना पड़ा है.

मालूम हो कि हाइड्रोक्लोरोक्वीन एक मलेरिया रोधी दवा है जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस के इलाज के लिए किया जा रहा है. प्रतिष्ठित न्यूज पेपर इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने हाइड्रोक्लोरोक्वीन 200 और 400 एमजी टेबलेट्स के 25 प्रतिशत स्टॉक को वापस भेज दिया है.

इंडियन टाइम्स में छपी खबर के अनुसार भारत और भारतीयों के लिए बुरी खबर तो है ही, उनकी जिंदगी के साथ सीधे सीधे खि’ल’वाड़ भी है. राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है. कोरोना वायरस की गं’भीर’ता को देखते हुए राज्य सरकार ने हाइड्रोक्लोरोक्वीन का बड़ा स्टॉक अपने यहां रखा था.

हाइड्रोक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल गंभीर परिस्थितियों में किया जाता है. मलेरिया के साथ साथ ग’ठिया के रोगियों के भी इलाज में हाइड्रोक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल होता है. अब अमेरिका को निर्यात करने के बाद इस दवा की कमी हो चुकी है और मरीजों की मुश्किलें बढ़नी शुरु हो गई है.

अमेरिकन राष्ट्रपति की ध’मकी के आगे भारत एका’ध दिन भी सीना तान कर खड़ा नहीं हो सका और घंटे दो घंटे में सरेंडर बोल गया. पहले सरकार ने कोरोना वायरस की म’हामा’री को मद्देनजर हाइड्रोक्लोरोक्वीन की मांग को देखते हुए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था

लेकिन ट्रंप के आगे हम अपने इस प्रतिबंध पर कायम नहीं रह सके और आज देश अब इसकी कीमत भुगतने को तैयार है. फिलहाल राजस्थान में मरीजों की मुश्किलें बढ़ रही है और अब देश भर में लोगों पर इसका कहर बरप सकता है.

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