VIDEO: आज से 90 साल पहले इन राज्य में हुआ था टिड्डियों का ह’मला, सैकड़ो हेक्टेयर इलाका साफ

भारत में इस समय टिड्डियों का आतं’क छाया हुआ हैं. पाकिस्तान के रेगिस्तान से आए टिड्डों ने भारत में हाहाकार मचा रखा हैं. अब तक कई भारतीय राज्य टिड्डियों के हम’ले का सामना कर चुके है, जिसकी शुरुआत राजस्थान से देखने को मिली थी. टिड्डियों के हम’ले के चलते कई किसानों पर बड़े पैमाने पर नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. वहीं अभी खरीब की फसल की वुवाई नहीं हुई है जिसके चलते नुकसान सिर्फ जायद फसलों को झेलना पड़ रहा हैं.

लेकिन अब खरीब की फसल की बोवनी का समय नजदीक आ चूका है ऐसे में टिड्डों से निपटना एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. आपको बता दें कि भारत में टिड्डी दलों का आक्र’मण एक लंबे समय बाद देखने को मिला है.  इससे पहले टिड्डियों का ह’मला करीबन 25 साल पहले देखने को मिला था.

लेकिन क्या आप जानते है कि अब तक का सबसे बड़ा टिड्डियों का हम’ला कब हुआ था? अगर नहीं तो हम आपको बताते है. टिड्डी दल का सबसे बड़ा ह’मला 20वीं शताब्दी की शुरुआत में देखने को मिला था. यह एक ऐसा हम’ला था जिसमें सैकड़ों एकड़ के फसलों से भरे खेत खाली हो गए थे.

20वीं शताब्दी की शुरुआत में उस समय के अर्स्ट हैदराबाद राज्य को टिड्डों ने अपना शिकार बनाया था. राज्य में निजाम तत्कालीन शासक थे. कहा जाता है कि उन्होंने इसके शिकार हुए किसानों की काफी मदद की थी.

इनता ही नहीं निजाम ने इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के द्वारा की गई सभी सिफारिशों का भी पालन किया. बता दें कि इसे अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के रूप में पहचना जाता हैं.

तत्कालीन हैदराबाद रियासत में दो तरह के टिड्डे देखे गए थे जबकि भारत के अन्य तत्कालीन रियासतों और क्षेत्रों में सिर्फ एक प्रकार के टिड्डियों द्वारा ह’मला किया गया था. जबकि हैदराबाद को एक पश्चिमी घाट से और दूसरे उत्तर भारत से आए दोनों प्रकार के टिड्डियों का सामना करना पड़ा था.

तत्कालीन हैदराबाद राज्य पर टिड्डियों ने 1929 में ह’मला किया था. इस दौरान पश्चिमी घाट से निकलने वाले टिड्डों ने रियासत के कई इलाकों में सबसे ज्यादा तबा’ही मचाई थी. यह क्षेत्र मौजूदा समय में महाराष्ट्र का हिस्सा है. इसके परिमाण अकालों पर भी देखने को मिले थे.

कराची में तत्कालीन इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च से जुड़े येलसेटी रामचंद्र राव ने हमले की तीव्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि टिड्डियों के दल इतने बड़े थे कि सूरज की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देते थे.