शर्मनाक: पुराने वीडियो दिखाकर कुछ मीडिया वाले ‘किसान आंदोलन’ के खिलाफ़ माहौल बना रहे हैं

पाकिस्तान समर्थन में नारे लगाए जाने का एक वीडियो किसान आंदोलन से जोड़कर किया जा रहा है वायरल. दरअसल यह वीडियो 2019 का है जब न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय के बाहर कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का हवाला देते हुए पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुआ था.

जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है तभी से किसानों को लगातार बदनाम करने की बातें सामने आ रही हैं और यह काम कोई और नहीं बल्कि सबसे ज्यादा देश का मेन स्ट्रीम मीडिया ही कर रहा है. आपको बता दें कि देशभर के किसान पिछले 16 दिनों से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

वहीं पंजाब और हरियाणा के किसान सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं किसानों का कहना है कि यह तीनों कानून काले कानून हैं। सरकार को यह काले कानून वापस ले लेने चाहिए उन्होंने कहा, जब तक सरकार इन कानूनों को वापस नहीं ले लेती तब तक वह सड़क से नहीं हटेंगे लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है। इन सब के बीच जहां किसान सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं वहीं विरोध में किसानों पर खालिस्तानी होने जैसे आरोप भी लग रहे हैं।

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दरअसल सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन से जुड़ा हुआ एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसके बाद से ही किसानों पर खालिस्तानी जैसे आरोप लगने शुरू हो गए और उसके बाद तो मेन स्ट्रीम मीडिया में किसान आंदोलन कम खालिस्तानी शब्द ज्यादा देखने को मिला है।

आपको बता दें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में अल्लाह-हू-अकबर और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे लग रहे थे. और इस तरह का वीडियो जब सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन के नाम से वायरल होने लगा तो लोगों ने किसानों को देशद्रो’ही कहना शुरू कर दिया और इसके बाद की कमान संभाली देश के मेन स्ट्रीम मीडिया ने।

उन्होंने लगातार किसानों पर जमकर आरोप लगाए उन्हें देशद्रो’ही खालिस्तानी जाने क्या क्या कहा लेकिन क्या आप उस वीडियो का सच जानते हैं कि वह वीडियो क्या वाकई किसान आंदोलन से ही जुड़ा हुआ है या कहीं और से किसान आंदोलन से जुड़े हुए इस वीडियो के बाद सिर्फ देश का मीडिया ही किसानों को बदनाम नहीं कर रहा था बल्कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कितने ही नेताओं ने इस वीडियो को अपने ट्विटर एकाउंट से शेयर किया था।

लेकिन इस वीडियो की सच्चाई कुछ और थी। अक्सर फेक न्यूज़ का खुलासा करने वाली न्यूज़ वेबसाइ आल्ट न्यूज़ ने जब इस वीडियो की पड़ताल की तो उन्होंने पाया कि है वीडियो किसान आंदोलन का है ही नहीं।