बोलने की आज़ादी केवल इस्लाम और पैग़म्बर मोहम्मद के ख़िलाफ़ ही क्यों? AIMIM नेता

फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के विवा’दित कार्टून पर मचे बावल के बीच सिलसिलेवार ढंग से कई ह#त्याएं हो चुकी हैं. पहले एक शिक्षक का गला का’टकर  ह#त्या कर दी गई और फिर चर्च के पास एक महिला समेत तीन लोगों की भी गर्दन रेतकर मौ#त के घाट उतार दिया गया. इसी बीच भारत में भी इन घटनाओं पर बयानबाजी का दौर चल रहा है. इस मामले में अब AIMIM के आसिम वकार भी ह#त्यारों के पक्ष में उतर आए हैं.

उन्होंने एक टीवी डिबेट में बात करते हुए कहा कि अगर कोई भी पैगंबर मोहम्मद की बेज्जती करता है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आखिर बोलने की आज़ादी सिर्फ इस्लाम और पैग़म्बर मोहम्मद साहब के ख़िलाफ़ ही क्यों है?

asim waqar

वक़ार ने आगे कहा कि मैं आपको एक लाइन बताता हूं. एक घटिया दुश्मन होता है उसकी पहली पहचान यही होती है कि जब वो आपका ज़मीं पर मुकाबला नहीं कर पाता है तो वो आपके धर्म पर हम’ला सधता है.

उन्होंने कहा कि मैं किसी भी तरह की हिं#सा को समर्थन नहीं देता हूं लेकिन मैं यह यह भी बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं कि हमारे प्यारे नबी पैगंबर मोहम्मद की शान में किसी भी तरह की कोई गुस्ताखी की जाए. मैंने कभी भी किसी भी मजहब को बुरा नहीं कहा और न किसी मजहब की बेइज्जती की है. सवाल सिर्फ बोलने की आज़ादी का है.

वक़ार ने कहा कि ऐसा मामला फ्रांस से पहली बार सामने नहीं आया है, इससे पहले भी फ्रांस ऐसा कर चूका है. 1895 से 1901 के बीच में कई प्रयास किये जा चुके है. फ्रांस में जब थिएटर बनाया गया था तब उसमें रसूलअल्लाह की बेज्जती करने की प्रयास किया था. पूरी दुनिया के मुसलमानों ने इसका वि’रो’ध किया था.

उन्होंने कहा कि अगर आपको ज़बान की आज़ादी ही चाहिए तो मोहम्मद साहब और इस्लाम के खिलाफ ही क्यों? ईसा के खिलाफ क्यों नहीं, गीता के खिलाफ क्यों नहीं? वक़ार आगे कहा कि हो सकता है कि भारत के मुसलमानों के पैगंबर मोहम्मद साहब हो और फ्रांस वालों के न हों.

साभार- जनसत्ता