फ़िल्मी अंदाज़ में आधी रात को राजीव गांधी के एक फ़ोन कॉल ने बदल दी थी अजीत जोगी की ज़िंदगी, देखिए

छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी अब इस दुनिया में नहीं रहे. अजीत जोगी ने 29 मई को दुनिया छोड़कर चले गए. जोगी पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे. उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में करीब दो सप्ताह पहले कार्डियक अरेस्ट के बाद भर्ती किया गया था. 74 वर्षीय अजित जोगी छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे हैं.

जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ को नया राज्य बनाया गया था तब अजीत जोगी ही सूबे के पहले मुख्यमंत्री बने थे. जब से छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बना से तब से ही वहां की सियासत अजीत जोगी के इर्द-गिर्द ही घूमती रही हैं.

साल 2000 से 2003 तक वह राज्य में पहले मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यरत रहे. अजीत जोगी राजनीति में आने से पहले प्रशासनिक अधिकारी हुआ करते थे. आपको बता दें कि वह मध्यप्रदेश के शहडोल, सीधी , इंदौर जैसे जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं.

जब अजीत जोगी इंदौर में कलेक्टर थे इसी दौरान उनकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से हुई थी. 1986 में राजीव गांधी से संपर्क में आने के बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी का पद छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और सक्रीय राजनीति में कूद पड़े.

इसके बाद 1986 से 1998 तक अजीत जोगी लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट से राज्यसभा सांसद के तौर पर चुने गए. इसके बाद वह साल 1998 में लोकसभा चुनाव में उतरे और उन्हें रायगढ़ से टिकट मिला जिसमें उन्होंने जीत दर्ज करके लोकसभा पहुंचने का रास्ता बनाया.

इसी दौरान साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग करके नया राज्य छत्तीसगढ़ अस्तिव में लाया गया तब कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर चुना वह 2003 तक राज्य के सीएम रहे.

अजीत जोगी की दुर्घटना में स्वास्थ्य बिगड़े के कारण राजनीति में सक्रीयता कम हो गई. इसके बाद काफी उठक-पथक के चलते साल 2016 में अजीत जोगी ने कांग्रेस छोड़ दी इसके साथ ही उन्होंने अपनी खुद की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया.

पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सूबे में चुनाव लड़ा. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने करीबन 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिसमें से उन्हें 4 सीटों पर जीत मिली. हालांकि पार्टी अपनी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी लेकिन एक नई पार्टी के तौर पर उनका प्रदर्शन ठीक रहा. अजीत जोगी की इस राजनीति विरासत को अब उनके बेटे अमित जोगी संभाल रहे हैं.