जब पत्रकार अपनी पत्रकारिता भूल जाएँ, तो अखिलेश यादव जैसे नेताओं को पत्रकार बनना पढता है !

उत्तर प्रदेश में अस्त-व्यस्त कानून व्यवस्था के चलते अपरा@धियों के हौसले बुलंद हैं. और आए दिन उत्तर प्रदेश से बहुत संवेद@नशील खबरों के आने का सिलसिला लगातार जारी है. आपको बता दें कि इस महीने में सिर्फ उत्तर प्रदेश अकेले से ही इतनी घटनाओं की ख़बरें निकलकर सामने आ रही हैं जितना की देशभर में न हों शायद. अगर हम उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव क्रिकेटर हैंडल पर जाएंगे तो उनके अधिकतर ट्वीट उत्तर प्रदेश में हुयी वा@रदातों को लेकर ही हैं.

अखिलेश यादव वर्तमान सरकार को आइना दिखाना चाहते हैं उत्तर प्रदेश मैं कानून व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकी है. अभी हाल ही में एक के बाद एक कई घटनाओं को लेकर अखिलेश ने अपने टि्वटर हैंडल से एक के बाद एक कई ट्वीट भी किए हैं.

यहां तक कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर की गई पत्रकार द्वारा एक पोस्ट पर भी टिप्पणी की है उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा है पत्रकारों की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक ढांचे को दोस्त करने की दिशा में कदम है इसके अलावा सुल्तानपुर की 16 लाख की लूट के बारे में भी उन्होंने जिक्र किया है.

इसके अलावा मेरठ में शराब के ठेके को लूटे जाने की व पुलिस द्वारा किन्नरों को पीटने की बात भी लिखी है इतना ही नहीं बरेली में एक महिला होमगार्ड को सिंगर जला दिया गया और भाजपा सांसद के द्वारा सिपाही को थप्पड़ मारने की बात भी इन्होंने लिखि.

अखिलेश इन दिनों लोगों के बीच जा रहे हैं और उनसे में मिला भी कर रहे हैं और अभी हाल ही की बात है जब कहीं से लौट रहे थे तो उन्होंने एक भुट्टा बेचने वाले के ठेले के आगे अपनी कार रुकवा दी और भुट्टा लेने के लिए उससे आम नागरिकों की तरह है मोलभाव कर रहे थे.

इसका उन्होंने अपनी टि्वटर हैंडल पर ट्वीट भी डाला है कि दरअसल भुट्टा खरीदकर खाना तो सिर्फ एक बहाना है असली मकसद तो मेहनतकश का हौसला बढ़ाना है.

और वाकई भी क्यों ना हो एक अच्छे नेता को लोगों के बीच जरूर जाना चाहिए उन से मेल मिलाप रखना चाहिए इससे पता भी चलता है कि लोग आपको कितना पसंद करते हैं या कहां क्या चल रहा है.