शरा’ब के लिए लगी लंबी लाइन, अलका लांबा बोलीं रोज़े में तो पानी भी नहीं पिया जाता वर्ना यह केजरीवाल….

नई दिल्लीः बहुत देर से शरा’ब लॉबी जोर लगा रही थी कि लॉकडाउन में शरा’ब की बिक्री को खोल दिया जाए और आखिर अब मोदी सरकार ने उसकी बात मान ली है. लेकिन लॉक-डाउन के चलते इतना बड़ा फैसला लेते समय सरकार ने यह नहीं सोचा कि इससे गं’भी’र हो रही मान’सिक स्वा’स्थ्य की समस्याएं और घरेलू हिं’सा की समस्याएं तेजी से और बि’गड़ सकती हैं।

वही केंद्र सरकार के इस फैसले का कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स कैट ने वि’रोध किया है. कैट का कहना है कि यह फैसला निंदनी’य है. शरा’ब की दुकानें खुलेंगी, लेकिन व्यापारियों की दुकानें बंद रहेंगी, क्या शरा’ब जरूरी वस्तु है? कैट ने पूछा कि क्या शरा’ब की दुकान पर आने वाले ग्राहकों से को’रो’ना का ख’तरा नहीं बढ़ेगा? राज्य सरकारें अपने राजस्व के लालच में कोरो’ना को बढ़ावा दे रही हैं।

वही सरकार के फ़ैसले को बड़ी संख्या में आलोचना हो रही है. हलाकि सोशल मीडिया पर सरकार के इस फ़ैसले का समर्थन भी किया जा रहा है. तमाम लोग क’टा’क्ष और मज़ाक़ के रूप में तो वि’रोध और आलोच’ना कर रहे है. तो वही कुछ लोग लॉकडाउन में शरा’ब की दुकानों को खोले जाने के फ़ैसले को साज़ि’श भी बता रहे हैं।

ट्विटर पर एक यूज़र Harbhajan Singh ने पूर्वी दिल्ली के चंदर नगर इलाक़े की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा शरा’ब ख़रीदने वालों की लगभग एक किलोमीटर लम्बी लाइन दिखाई दे रही है. अच्छा हुआ रमजान का महीना चल रहा नहीं तो दा’रू के ठेके की भी’ड़ देख कर जमात वाले खाली पीली बदनाम हो जाते।

वही इस ट्वीट को दिल्ली की कांग्रेस नेत्री अलका लांबा ने रीट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधा है. अलका लांबा ने लिखा कि सही कहा, रोज़े में तो पानी भी नहीं पिया जाता, वर्ना यह दो’ष भी सं’घी केजरीवाल सरकार उन्हीं पर मढ़ देती।

अलका द्वारा किए गए इस रीट्वीट को ट्विटर यूज़र बड़ी संख्या में रीट्वीट कर रहे हैं जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी है. आपको बता दें की पिछले दिनों दिल्ली निज़ामुद्दीन मरकज़ का मामले आने के बाद बार बार को’रोना सं’क्र’मण को फैलने की ज़िम्मेदार तबलीग जमात पर थो’पा जाने का काम केजरीवाल ने कई बार किया था।

जिसपर मुस्लिम समुदाय के साथ साथ हिंदुओं ने भी नाराज़गी जताई थी और कहा था कि भाजपा अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए जिस तरह नेहरू को ज़िम्मेदार ठहरा देती है ठीक उसी तरह अरविंद केजरीवाल अब को’रो’ना की रो’कथाम में असफल होने की अपनी नाकामी जमातियों पर थो’प रहे हैं।

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