हिंदू दोस्त को बचाने के लिए रो-रोकर मदद मांगता रहा याकूब, आखरी सांस तक निभाई दोस्ती

शिवपुरी: देश भर में कोरोना संकट और लॉकडाउन के चलते पूरे माहौल को साम्प्रदायिक करने में लगे बेलगाम नेताओं और मीडिया की हजारों कोशिश के बावजूद कहीं ना कहीं से ऐसी खबर देखने को मिल रही है, जिससे लगने लगा है कि हिंदू मुस्लिम भाईचारा अभी भी बरकरार है. दरअसल, कोरोना संकट बीच लोग अपने घर पहुंचने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

देश भर में रोजाना सैकड़ों प्रवासियों की भी’ड़ सड़कों पर इस उम्मीद से दिख रही है कि वे एक दिन अपने गांव पहुंच जाएंगे. जिनकी तमाम ऐसी तस्वीरें हमें देखने मिल रही है.ऐसे में एक तस्वीर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आई है. जहां एक दोस्त ने मरते दम तक अपने दोस्त का साथ नहीं छोड़ा. यह तस्वीर बताती है कि इंसानियत और दोस्ती का रिश्ता आज भी सबसे ऊपर है।

 

इस पूरे वाकिये को पढ़ आप भी एक बार सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.

दरअसल, 24 वर्षीय अमृत गुजरात के सूरत से यूपी के बस्ती जिला स्थित अपने घर एक ट्रक से लौट रहा था. उस ट्रक में कई और लोग सवार थे. ट्रक जब मध्य प्रदेश के शिवपुरी-झांसी फोरलेन से गुजर रहा था, तभी अमृत की तबियत बिगड़ने लगी. ट्रक में सवार लोगों को लगा कि अमृत को कोरोना हो गया है, इसलिए डरकर लोगों ने उसे ट्रक से उतरवाने का फैसला किया।

सभी लोगों ने ट्रक को रुकवाया और अमृत को ट्रक से उतार दिया और आगे बढ़ गए लेकिन साथ में चल रहा अमृत का दोस्त याकूब मोहम्मद ने उसे अकेला नहीं छोड़ा, वह भी उतर गया ट्रक से उतरने के बाद अमृत की तबियत लगातार बिगड़ने लगी तो याकूब ने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और मदद की आस में बैठा रहा है. याकूब अमृत की सलामती की लगातार दुआ मांगता रहा।

इस दौरान याकूब मोहम्मद रास्ते में आती जाती गाड़ियों से रो-रो कर उसनें मदद भी मांगी, जिसके बाद एक दरियादिल आदमी ने उसे हास्पिटल तक पहुंचाया दिया याकूब ने अस्पताल पहुंचने तक अमृत का साथ नहीं छोड़ा था और उसे बचा लेने का ढांढस बंधाता रहा था, लेकिन खुदा को कुछ और ही पसंद था.

अव्यवस्था, बेबसी और इलाज में देरी के चलते अमृत ने द’म तोड़ दिया लेकिन इस घटना ने बता दिया कि भाईचारा अब भी कायम है. म’रने वाला मजदूर एक हिन्दू था और अंतिम द’म तक उसका साथ देने वाला मजदूर एक मुस्लिम था यही भाई चारा है और यही मानवता है, जिसे व्यवस्था खत्म कर नफ़रत बोए जा रही है।