#Fact Check- AMU के छात्रों ने नहीं लगाए “हिंदुओं की कब्र खुदेगी” नारे, भ्रामक है वो विडियो

नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िला’फ़, देशभर में प्रोटेस्ट चल रहा है, और इसी को लेकर दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी प्रोटेस्ट किया था. बीते रविवार की शाम से ही यह विरोध प्रदर्शन, हिंस’क विरोध प्रदर्शनों मैं कब बदल गया यह पता ही नहीं चला. इसमें छात्रों द्वारा पुलिस पर कई तरह के आरो’प लगाये जा रहे हैं, दूसरी और छात्रों पर भी तोड़फोड़, पत्थर बाज़ी और आगज’नी करने के आरोप हैं.

किसने क्या किया, कौन सही है या गलत है ये फिलहाल जांच का विषय है. जब कभी ऐसी घट’नाएँ होती हैं, तब सोशल मीडिया पर कुछ पॉलिटिकल पार्टियों के छुपे हुए, किराय के लोग या उनके आईटी सेल के मेंबर एक्टिव हो जाते हैं, और वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए एक समुदाय विशेष को दूसरे समुदाय के लोगों के खिला’फ भड़’काने का काम करते हैं.

आपको बता दें कि हमारे देश की लगभग सभी पोलिटिकल पार्टियाँ अपना अपना आई टी सेल चलती हैं. यह लोगों को गुमराह करके वोटों का धुर्विकरण करने की कोशिश करती हैं. इनमें सैलरी या कमीशन पर काम करने वाले लोग होते हैं जो इनके द्वारा बनाये गए किसी फोटो या विडियो पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने का काम करते हैं.

इन आई टी सेल के लोगों का काम होता है कभी फर्जी फोटोशॉप का सहारा लेकर, किसी को बदनाम करना. या किसी फर्जी वीडियो को एडिट करके एक टारगेट की हुई जनता में यह विश्वास दिलाना की देखो यह फलां धर्म के लोग फलां धर्म के लोगों के बारे में कैसी सोच रखते हैं.

कुल मिलाकार ये आपकी भावनाओं को भड़’काने का काम करते हैं. आपका ब्रेन वाश करते हैं. देश में कई ऐसी वेबसाइट मौजूद हैं, जो ऐसे लोगों का सच सामने लाकर आपके सामने सच क्या है वह बतातीं हैं. इन्होने अब तक कई फेक न्यूज़ के खुलासे किये हैं. ऐसी ही एक वेबसाइट है ‘ऑल्ट न्यूज़’.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का, सोशल मीडिया में वायरल हो रहा एक भ्रामक विडियो. इसी ऑल्ट न्यूज़ की वेबसाइट ने खुलासा किया है. इस विडियो में छात्र आपको नारे लगाते दिख रहे हैं. सुनने में लगता है कि छात्र इस विडियो में नारे लगा रहे हैं वह सच है.

इस वायरल विडियो में आपको अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों को ये नारे लगाते हुए सुना जा सकता है.

“हिंदुत्व की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, सावरकर की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, बीजेपी की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, ब्राह्मणवाद की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, ये जातीवाद की कब्र खुदेगी”

दोस्तों यहाँ  गौर करने वाली बात यह है, कि यह वीडियो 12 दिसंबर, 2019 को इस ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया गया है. गौर देने वाली बात यह है कि इस वीडियो से उन सभी वायरल हो रहे विडियो की अगर तुलना की जाय तो इस वीडियो को ज़ूम-इन किया गया है.

AMU Original Video Hindutva ki kabar khudegi AMU ki Dharti par

दरअसल यह विडियो सोशल मीडिया पर कई बार डाउनलोड और अपलोड करने के चलते इस वीडियो क्लिप की विडियो और ऑडियो की गुणवत्ता ओरिजिनल विडियो के मुकाबले काफी ख़राब हो गयी है.

दिल्ली के भाजपा प्रवक्ता, तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अपने ट्विटर हेंडल से इस वायरल वीडियो को एक दूसरे वीडियो के साथ पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने दावा किया है कि “यह CAB के खिलाफ प्रदर्शन नहीं बल्कि स्पष्ट रुप से गज़वा-ए-हिंद का आह्वान है.

तेजिंदर पाल के इस विडियो को पोस्ट लिखे जाने तक, दस हज़ार से भी ज्यादा रीट्वीट मिले हैं. और इस विडियो को 16 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों ने पसंद किया है.

नीचे आप जो ट्वीट देख रहे हैं, वो भाजपा के सोशल मीडिया हेड ने अपने ट्विटर हेंडल से शेयर किया है, जिनका नाम अमित मालवीय है.

अमित के इस विडियो को पोस्ट लिखे जाने तक, सात हज़ार से भी ज्यादा रीट्वीट मिले हैं. और इस विडियो को 11 हज़ार से भी अधिक लोगों द्वारा पसंद किया गया है.

जब हमनें फेसबुक पर इस लाइन “‘हिंदुओ की कब्र खुदेगी, AMU की धरती पर'” को डालकर सर्च किया तो वहां भी ऐसे विडियो की लम्बी लिस्ट दिखाई दी, यह सभी विडियो एक जैसे हेडिंग के साथ कई पेज और ग्रुप में शेयर किये गए हैं.

Bhramak AMU ka video
फेसबुक से लिया गया स्क्रीनशॉट

अब एक और नीचे वाला जो ट्वीट आप देख पा रहे हैं, वो भी भाजपा के एक सोशल मीडिया इंचार्ज ने किया है, जो जम्मू कश्मीर और लद्दाख का प्रभारी है. इसका नाम रोहित चहाल है, और ट्विटर पर इसनें अबाउट में अपने आपको एक नेशनल शूटर भी दर्शाया हुआ है.

इस तरह के विडियो देखने और ये नारे सुनने के बाद लोगों में समुदाय विशेष के लिए कितना गु स्सा है, नीचे आप खुद इनका कैप्शन पढ़कर देख सकते हैं.

इस विडियो के साथ पोस्ट किये जा रहे गलत और भ्रामक कैप्शन की वजह से लोगों में ग़लतफ़हमियाँ पैदा हो रही हैं. हो सकता है कि देश के किसी हिस्से में किसी की जान या माल के नुक्सान के ज़िम्मेदार ये समाज के लोगों में ज़हर घोलने वाले लोग हों.

पूरा सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर और व्हात्सप्प पर ये विडियो फैलता ही जा रहा है. लोगों को जागरूक करने, सही और गलत के बीच फर्क देखने के लिए आपका एक शेयर बहुत काम आ सकता है. अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह पोस्ट ज़रूर शेयर करें.

असली और भ्रामक विडियो के बीच की जाँच का तथ्य

ट्विट्टर पर और अधिक छानबीन करने से ऑल्ट न्यूज़ को वह वीडियो मिला, जिसमें बेहतर दिखाई और सुनाई दे रहा है. उपर पोस्ट किये गए वीडियो को सुनने पर यह स्पष्ट हो रहा है कि यह दावा कि छात्रों ने हिन्दू विरो’धी नारे लगाए हैं, यह बात पूरी तरह से गलत है. विडियो में जो नारे सुनाई दे रहे हैं वह वास्तव में छात्र हिंदुत्व, सावरकर, भाजपा, ब्राह्मणवाद और जातिवाद के खिला’फ नारे लगाये जा रहे हैं.

जब आपका कोई दोस्त इस तरह का वीडियो अपने फेसबुक ट्विटर पर शेयर करता है, या व्हाट्सएप के जरिए आपको भेजता है. आपके मन में भी समुदाय विशेष के खिला’फ जो भावना उत्पन्न होगी वह व्याख्यान करने की ज़रुरत नहीं है.

जो लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं, उनके नीचे उसके आप कमेंट पढ़ कर देख सकते हैं. लोग बिना सच जाने इतने गु’स्से में हैं कि समुदाय विशेष को बिना सोचे समझे भला बुरा लिख रहे हैं. अपनी अगली पोस्ट में, में आपको बताऊंगा की देश में झूठ की फैक्ट्री कहाँ से चलती है, और वहां पर किस तरह से काम किया जाता है.

किस तरह से प्लान करके राज्य और शहरों में नफर’त परोसी जाती है. जो लोग यह काम करवाते हैं, या करते हैं वो आज से पाँच साल पहले कहाँ थे और उससे पहले क्या किया करते थे… सच जानना आपका अधिकार है.

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