VIDEO: बेहद शर्मना’क, मिड-डे-मील के नाम पर नमक-रोटी के बाद अब बच्चों को परोसा हल्दी-पानी

देशभर में सरकार द्वारा चलाई जा रही मिड-डे मील की योजना आज भी बच्चों तक नहीं पहुँच पा रही है| कई गांव में इसके घोटा’ले को लेकर सच सामने आये हैं तो कहीं से आये दिन ख़राब खाने को लेकर खबर आती रहती हैं| आपको याद होगा की आज से कुछ दिन पहले उत्तरप्रदेश के मिड-डे मील (Mid-Day Meal) को लेकर सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल आदि पर काफी विरो’ध चला था क्यूंकि गरीब और छोटे छोटे स्कूल में पड़ने वाले बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर बच्चो को खाने के नाम पर नमक और रोटी दी जा रही थी|

ऐसा ही कुछ इस बार की खबर में भी सामने आया है जिसके चलते मिड-डे मील में बच्चों को हल्दी पानी दिया जा रहा है| दरअसल यह खबर भी उत्तरप्रदेश की है जहां से मिड-डे मील (Mid-Day Meal) में घोटा’ले का एक और वीडियो वायरल हो गया है। आपको बता दें कि ये वायरल वीडियो सीतापुर का बताया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बच्चों को मिड-डे मील (Mid-Day Meal) में दलीय की जगह हल्दी का पानी दिया जा रहा है।

इस वीडियो को शेयर करने वाला शख्स आदित्य जयराम तिवारी (Aditya Jairam Tiwari) अपने आपको पत्रकार बता रहा है| उसने अपनी प्रोफाइल से इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि यूपी के सीतापुर में मिड डे मील की लापरवाहि’यों की एक और तस्वीर तहरी की जगह हल्दी का पानी पीला रहे हैं बच्चो को! स्कूल में बन रहे मिड डे मील में घो’र लापरवा’ही, मेन्यू के हिसाब से आज बनाई गई थी तहरी, तहरी के नाम पर बच्चो को पिलाया हल्दी का पानी|

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश में मिड-डे मील घोटा’ले का यह कोई पहला माम’ला नहीं है, इससे पहले भी उत्तरप्रदेश के मिर्ज़ापुर से एक ऐसा ही माम’ला सामने आया था, जिसमें एक स्थानीय पत्रकार पवन जायसवाल ने मिर्जापुर के एक प्राइमरी स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील में नमक-रोटी दिए जाने का ख़ुला’सा किया था।

 

हालांकि पत्रकार पवन जायसवाल (Pawan Jaiswal) के इस ख़ुलासे से प्रशासन नाराज़ हो गया था और उनके ख़िला’फ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। वहीँ पत्रकार के खिला’फ पुलिस की कार्रवाई को लेकर ज़िलाधिका’री अनुराग पटेल ने अदालत में एक बेतु’की सफा’ई भी दी थी।

जानकारी के मुताबिक़ ज़िलाधिकारी अनुराग पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि जनसंदेश अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल ने प्रिंट मीडिया के बजाए ख़बरि’या चैनल की तरह वीडियो वायरल किया था।

साथ ही उन्होंने कहा था कि पत्रकार को अपने समाचार पत्र में फोटो सहित समाचार छापना चाहिए था, जबकि उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था, इससे लगता है कि वह किसी तरह की साज़िश में शामिल थे।

जानकारी के लिए बता दें कि पत्रकार के खिला’फ़ की गई इस कार्रवा’ई के विरो’ध में स्कूल के अभिभावक से लेकर देशभर के कई पत्रकार उतर आए थे। इन लोगों का कहना था कि प्रशासन अपनी लापरवा’ही को छुपाने के लिए सच की आवाज़ को दबाना चाहता है।

साभारः #Jagran