देशभर के युवाओं में असदुद्दीन ओवैसी के प्रति बढ़ रही है दीवानगी, वजह जानना नहीं चाहेंगे आप?

अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहने वाले एमआईएम पार्टी के संस्थापक, असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के प्रति बीते कुछ महीनों में देशभर के युवाओं, खास तौर पर मु’स्लिम समुदाय के लड़कों में असदुद्दीन ओवैसी के प्रति चाहत बढ़ रही है. हालाँकि यह दायरा पहले सिर्फ हैदराबाद तक सीमित था, लेकिन अब देशभर में देखने को मिल रहा है.

अगर हम सिर्फ हैदराबाद के अलावा और बात करें जो मानिये के दूसरे सबसे बड़ा नम्बर हो तो वो है, महाराष्ट्र. जी हाँ, पिछले 5 सालों में जो AIMIM ने यहाँ जो जलवा कायम किया है वह, बीते कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश, बिहार, और अब बंगाल में जिस तरह से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने जो द’म दिखाया है उसकी वजह से समाज के युवाओं में भी एक नयी उम्मीद देखने को मिल रही है.

नौजवानों में क्यों हैं असदुद्दीन ओवैसी मु’स्लिम नेता के तौर पर पहली पसंद?

Asaduddin Owaisi in Bangal Election

आपको बता दें इसकी वजह बिलकुल साफ़ है, ऐसा इसलिए क्यूंकि जब जब देश में मुसलमानों के लिए आवाज़ उठाए जाने या फिर उन पर हो रहे अत्या’चार के लिए इन्साफ माँगने की बात आती है तो वो सिर्फ MIM पार्टी प्रमुख की आती है. जबकि बीते कुछ सालों में कांग्रेस इस मामले में बचती हुई नज़र आती है.

देश में चल रहे कई ऐसे मुद्दों पर सिर्फ और सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी ने ही, उस बात को बुलंदी से उठाया. जैसा कि हम मान के चलें ‘तीन तलाक’ के कानून पर असदुद्दीन ओवैसी ने देश के सामने और संसद में इसके नु’कसान गिनवाए कैसे पति और पत्नी दोनों की ज़िन्दगी त’बाह होगी वो बताया.

वहीँ मुसलमानों से जुड़ा हुआ सबसे संवे’दनशील मुद्दा, बाबरी मस्जिद पर भी देश में से सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी की ही आवाज आ रही थी. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एम आई एम ने बीते कुछ महीनों में हुए चुनाव के दौरान भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया जिसमें से ये लोग महाराष्ट्र में तो काफी अच्छी स्थिति में पहुंच चुके हैं.

अभी हो सकता है आने वाले समय में महाराष्ट्र के अन्दर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम एक बड़ी पार्टी बनकर उभरे. इसके अलावा बिहार चुनाव में भी पहली बार में ही जो सीटें ये लाये हैं, उसमें भी इन्होने नौजवानों का भरोसा जीता.

एम आई एम पार्टी उत्तर प्रदेश में भी शुरुआती दौर के हिसाब से अच्छा प्रदर्शन करके निकली, और अब हाल ही में पश्चिम बंगाल में इनकी पार्टी कितनी सीटे लेकर आएगी ये भी देखिएगा आप.

सोशल मीडिया पर युवाओं के हीरो हैं ओवैसी

इसको पढ़कर आप ये मत समझने लगना कि हमने इनकी पार्टी या ओवैसी जी से ये लिखने के लिए पैसा लिया है:). लेकिन यह बात सच है सोशल मीडिया पर असदुद्दीन ओवैसी के चाहने वालों की तादाद कम नहीं है दोस्तों, हालांकि ऐसा नहीं है कि सिर्फ चाहने वाले ही हैं, उनकी आलो’चना करने वाले खुद मु’स्लिम समुदाय के लोग भी कम नहीं हैं.

लेकिन पार्टी और उसको सपोर्ट करने वाले लोगों की काफी बड़ी तादाद, इस बात की जरा भी परवाह नहीं करती कि लोग असदुद्दीन ओवैसी की तुलना किस तरह से करते हैं, या उन्हें उनके ऐसे कौन से काम हैं जो पसंद नहीं आते.

नौजवान जो कल का भविष्य हैं, वह तो बस अपने नेता प्रमुख को ऊंचे पद पर और तरक्की करते हुए देखना चाहते हैं. यही वजह है कि असदुद्दीन ओवैसी हमेशा देश के मुसलमानों के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाते हैं. चाहे संसद हो या फिर न्यूज़ चैनलों की टीवी डिबेट, वह अपनी बात तर्क से रखते हैं.

मेरे ख्याल से उन्होंने आज तक कोई भी ऐसा बयान नहीं दिया है, जो बिना सर पैर का हो जबकि आपने कई टीवी डिबेट में ये देखा होगा कि कई पार्टियों के प्रवक्ता या फिर नेता बिना सर पैर की बात करते हुए ज’बरन चिल्ल po करते हुए नजर आते हैं.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।