अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले मिली 5 एकड़ जमीन पर बनने वाली मस्जिद पर उठे सवाल, मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड…

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के संयोजक जफरयाब जिलान ने बताया शरीयत के खिलाफ.

कई सालों से चला आ रहा अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवा’द पर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए वि’वा’दित जमीन को हिंदू पक्ष को मंदिर बनाने के लिए तथा मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या से 30 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में 5 एकड़ भूमि देने का यूपी सरकार को फैसला सुनाया था।

बता दें कि हाल ही में सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा धन्नीपुर गांव में बनाई जाने वाली मस्जिद का नक्शा भी जारी किया गया था। लेकिन अब ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएलपीएमबी ) के कार्यकारी सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने मस्जिद निर्माण पर सवाल खड़े किए हैं।

जब जमीन ही अवैध होगी तो मस्जिद भी अवैध होगी:-

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जागरण डॉट कॉम की खबर के अनुसार जफरयाब जिलानी ने मस्जिद निर्माण को शरीयत के खिलाफ बताया है। जफरयाब जिलानी ने कहा कि ‘प्रस्तावित मस्जिद जिसका खाका हाल ही में लॉन्च किया गया वफ्फ एक्ट और शरीयत के खिलाफ है।

उन्होंने बताया कि ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी मस्जिद कमेटी शुरू से ही बाबरी मस्जिद की जमीन की अदला-बदली के खिलाफ रही है और जब सुप्रीम कोर्ट में यह केस चल रहा था तो सर्वोच्च न्यायालय के सामने भी यह बात प्रस्तुत की गई थी कि कमेटी मस्जिद की जमीन की अदला बदली नहीं कर सकती’। ऐसे में अब उनका कहना है कि यह शरीयत के कानून का उल्लंघन करती है क्योंकि वफ्फ अधिनियम शरीयत के कानून पर ही आधारित है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य जफरयाब जिलानी ने बताया कि जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अयोध्या से 30 किलोमीटर दूर जमीन देने की बात आई तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के दो सदस्यों ने इसे अस्वीकार कर दिया था वहीं बोर्ड में शामिल चार सदस्यों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी भी शामिल थे।

जिसकी वजह से बोर्ड ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन को छोड़कर सरकार की जमीन की पेशकश को स्वीकार कर लिया। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस जमीन को गैर कानूनी और नाजायज ही मानता है।

जिलानी ने कहा कि हमने एक स्टैंड लिया था कि मस्जिद के बदले जमीन लेना गैरकानूनी है ऐसे में जब जमीन ही अवैध है तो उस पर बनी मस्जिद भी अवैध होगी और हम अवैध मस्जिद नहीं चाहते।