VIDEO: बाबरी मस्जिद एक मस्जिद थी और हमेशा मस्जिद ही रहेगी, कब्ज़ा कर लेने से स्थिति समाप्त नहीं हो सकती, AIMPLB

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने वाला हैं. इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर ट्वीट करके कहा कि दिल तोड़ने की कोई जरूरत नहीं है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर को अपने फैसले में विवादित जमीन राम मंदिर के लिए न्यास को दे दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले पर सवाल उठाते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्वीटर पर लिखा कि #BabriMasjid थी और हमेशा एक मस्जिद ही रहेगी. हमारे लिए #HagiaSophia एक बेहतरीन उदाहरण है.

उन्होंने आगे लिखा कि अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण के फैसले से होने वाला भूमि का पुनर्निमाण इसे बदल नहीं सकता है. दिल तोड़ने की जरूरत नहीं है, स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती है. इसके साथ ही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस रिलीज भी जारी किया हैं.

पिछले साल अयोध्या मामले को लेकर नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका AIMPLB द्वारा  दायर की गई थी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश किया कि वो मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में एक मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित कराए.

वहीं फैसले के बाद AIMPLB ने कहा कि वो वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन को स्वीकार नहीं करेगा. साथ ही जमीयत उलमा-ए-हिंद (JUH) ने कहा था कि वो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का विरोध करते है.

 

लेकिन इस मामले में AIMPLB पक्षकार नहीं था, हालांकि वो तीन मुकदमों में आरोपी था. अयोध्या शहर के निवासी मोहम्मद उमर खालिद, अयोध्या जिले के रहने वाले मिस्बाहुद्दीन और अंबेडकरनगर जिले के टांडा शहर के निवासी महफूजुर रहमान ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की थी हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी समीक्षा याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया था.

136 साल पुराने अयोध्या विवाद को लेकर सां’प्रदा’यिक तनाव उस समय बढ़ा जब 6 दिसंबर, 1992 को एक भीड़ द्वारा बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया गया. बाबरी के ध्वस्त होने के बाद देश भर में कई जगहों पर दं’गे हुए और इसमें करीब 2,000 लोगों की मौ’त हो गई.