बाबा रामदेव के पतंजलि की जांच में खुली पोल, शहद में 80% चीनी का घोल मिलाते हैं बाबा

भारत में बिक रहे 13 छोटे-बड़े ब्रैंड्स के शहद का टेस्ट होने पर नतीजा चौंकाने वाले आये इन 13 में से 10 ब्रैंड्स के सैंपल फेल पाए गए है। जिसमें बाबा रामदेव की पतंजली और कई नामी कंपनी शामिल है।

03 दिसंबर 2020: कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आजकल बहुत सारे लोग दैनिक रूप से कई तरह के देशी काढ़ा बनाकर पी रहे हैं। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे भी जो बड़े-बड़े कंपनियों के ब्रांड्स पर वे भरोसा कर के उनका इस्तेमाल कर रहे है. बता दें जर्मन की एक लैब में हुए टेस्ट के नतीजों में भारत में बिक रहे 13 छोटे-बड़े ब्रैंड्स के शहद का लैब में सैंपल भेजा गया, जहां टेस्ट होने पर नतीजा चौंकाने वाले आये इन 13 में से 10 ब्रैंड्स के सैंपल फेल हो गए।

वही सबसे हैरान करने वाली बात यह है की ये वही सैंपल हैं, जो भारत में हुए टेस्ट में पास हो गए थे. लेकिन जब इन्हीं का विदेश में टेस्ट किया गया तो ये सारे के सारे फेल हो गए. जिनमे बड़े पैमाने पर मिलावट पाई गई। आपको बता दें इस गोरखधंधे में बाबा रामदेव की पतंजलि से लकर डाबर जैसे ब्रांड तक शामिल हैं।

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जर्मन की लैब सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के इस जाँच के नतीजे को उन्होंने ख़ारिज करते हुए साज़िश क़रार दिया है। वही लैब में हुए इन परीक्षण से इस बात का भी पता चला है, की कौन सा शहद किस ख़ास फूल से कब और किस देश से निकाला गया। इसलिए इसमें चूक की कोई गुुंजाइश नहीं है।

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट बताती है कि इन सैंपल में 77 फ़ीसदी नमूनों में शुगर सिरप की मिलावट बताई गई है। आपको बता दें परीक्षण में 13 में से सिर्फ 3 ब्रांड्स ही पास हो सके है। वही सीएसई का कहना है कि चीन की कंपनियों ने इस तरह के शुगर सिरप तैयार किये हैं जो भारत में जाँच पर आसानी से खरे उतरते हैं। इसलिए इन नमूनों की जर्मनी की प्रयोगशालाओं में गहराई से पड़ताल की गयी है।

बता दें 13 ब्रांड्स में से सिर्फ 3 ब्रांड्स ही पास हो सके है. फेल होने वाले ब्रांड्स में शामिल है. डाबर पतंजलि बैद्यनाथ झंडू प्योर एपिस हिमालयन और हितकारी. सिर्फ तीन ब्रांड्स के शहद शुद्ध पाए गए है जो है सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर. और इन शहद को तैयार करने में जिन शुगर सिरप का इस्तेमाल किया जा रहा है, वो चीन से आ रहे हैं।

सीएसई के फूड सेफ्टी एंड टॉक्सिन टीम के निदेशक अमित खुराना ने कहा की इस मिलावट को पकड़ पाना बेहद मुश्किल भरा है। इस सिरप इस तरह से तैयार किया गया हैं कि उसके तत्वों को पहचाना न जा सक।

आपको बता दें इस ख़बर के सामने आने पर शहद बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियों में खलबली मची हुई है। वही डाबर ने सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए अपने शहद को सौ फ़ीसदी शुद्ध बताया है। वहीं पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर ने इसे भारतीय निर्माताओं को बदनाम करने की साज़िश बताया है।