VIDEO: क्या बाबरी मस्जिद की कहानी दोहराने की तैयारी, अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद की बारी

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं. इसके सात ही फिरकापरस्तों के हौसले बेहद बुलंद हो चुके है. सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से अयोध्या के बाद काशी और मथुरा की बारी जैसे अभियान और हैजटैग ट्रेंड कराए जा रही हैं. वहीं खबर है कि इसे लेकर गुपचुप बैठकें भी शुरू हो चुकी हैं. इतना ही नहीं मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को मुक्त कराने के लिए बोर्ड तक का गठन हो चुका है.

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस बोर्ड में 80 साधु-संत को शामिल किया गया है. साथ ही दुनिया को दिखाने के लिए कानूनी ल’ड़ाई की प्रकिया भी शुरू कर दी गई है. सब कुछ बाबरी मस्जिद मॉडल के आधार पर करने की योजनाएं बनाई जा रही है.

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मामले में एक तरफ दिखाने के लिए इसे कोर्ट में चलाया गया था और दूसरी तरफ मस्जिद को ढाह दिया गया था. हिंदुत्वादी संगठनों को यकीन हो चूका है कि वो ताकत और संख्या बल के आधार पर कुछ भी कर सकते हैं.

जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद के मामले में बहुसंख्यक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया, उससे इन लोगों के हौसले बुलंद हो गए हैं.

यही वजह है कि अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास होते ही वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद के मुद्दे को संगठनों को कुछ राजनितिक पार्टियों ने ठंडे बस्ते से निकाल लिया है और अब इन मुद्दों को हवा देना शुरू भी कर दिया है.

आपको बता दें कि हिं’दू संगठनों का दावा हैं कि वाराणसी (बनारस) में जहां ज्ञानवापी मस्जिद स्थित है, वहां पर प्राचीनकाल में मस्जिद से पहले ज्योतिर्लिंग का मंदिर हुआ करता था लेकिन इसे मुगल काल में तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था.

सोमवार को इस मामले को लेकर वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुनवाई भी हुई. लेकिन कोर्ट में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति के चलते सुनवाई को 1 सितंबर तक के लिए टाल दी गई.

हिंदू पक्ष का दावा है कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से लगी हुई ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पहले ज्योतिर्लिंग मंदिर हुआ करता था. लेकिन बाद में मुगलों ने इसे तो’ड़कर मस्जिद बना दी थी. अगर कोर्ट पुरातत्व विभाग से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में खुदाई कराने के निर्देश देती है तो जाहिर तौर पर यहां मंदिर के अंश जरुर देखने को मिलेगें.