लद्दाख में 20 सैनिक शहीद: कोई 17 दिन की अपनी बच्ची का चेहरा देखने को था बेकरार, तो किसी को हल्दी लगने का था इंतजार

चीन और भारत की सीमा पर पिछले काफी समय से विवाद बना हुआ है. भारतीय सैनिक और चीनी सैनिकों के बीच झ’ड़प जारी है. चीन के साथ पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15-16 जून की रात हुई हिं’सक झड़प के दौरान भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. खबरों के अनुसार इस दौरान चीन के 43 सैनिक भी मा’रे गए हैं. देश भर में जवानों की शहादत को याद किया जा रहा है साथ ही सरकार से इस हा’दसे पर जल्द से जल्द जवाब देने की मांग कर रहे हैं.

एक घटना में शहीद हुए जवानों में ज्यादातर युवा थे. इसमें एक कर्नल, एक नायब सूबेदार और एक हलवदार भी शामिल हैं. सरकार ने शहीद हुए जवानों के नाम की एक लिस्ट भी जारी की हैं. लिस्ट के अनुसार सबसे ज्यादा 13 जवान बिहार रेजीमेंट के शामिल थे. हम आपको इन जवानों की कहानी से रूबरू करा रहे हैं.

मध्यप्रदेश के रीवा का एक बेटा भी शहीद हो गया है. 21 वर्षीय दीपककी शादी 8 माह पहले ही हुई थी. मंगलवार को दीपक ने अपनी पिता से फोन पर बात की थी. लेकिन तब दीपक के पिता को क्या पता नहीं कि अगले दिन उन्हें अपने बेटे ही आवाज सुनाई नहीं देगी.

इस झड़प में बिहार के सहरसा गांव के कुंदन कुमार भी शहीद हो गए हैं. 26 वर्षीय शहीद कुंदन 17 दिन पहले ही पिता बने थे. लेकिन वह अपनी प्यारी से बेटी का चेहरा तक नहीं देख सके और देश के लिए शहीद हो गए.

सुनील कुमार पटना के बिहटा के तारा नगर के शिकरिया के रहने वाले हैं. 35 साल के सुनील जल्द ही छुट्टी लेकर घर लौटने की तैयार कर रहे थे. सुनील की मां ने बताया कि मेरा बेटा घर आने वाला था लेकिन वह देश के लिए शहीद हो गया. सुनील के पिता को लकवा की बीमारी है.

चीनी सेना से लोहा लेते हुए शहीद हुए राजेश ओरंग बिहार के रहने वाले थे. उनके पिता ने कहा कि मेरे बेटे ने देश की सेवा की और अपनी जा’न दे दी. राजेश की माँ को बेटे के आने का इंतजार था, इस गर्मियों की छुट्टियों में बेटे की शादी करना चाहती थी.

चीन से हुई इस झड़प में सेना के कर्नल संतोष बाबू भी शहीद हो गए. तेलंगाना के संतोष बाबू पिछले साल ही घाटी में तैनात हुए थे. कर्नल के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं. संतोष ने हैदराबाद के सैनिक स्कूल से पढ़ाई की थी इसके बाद वो एनडीए के लिए चुने गए थे.

इस झड़प में तमिलनाडु के हवलदार पलानी भी शहीद हुए हैं. वह दो बच्चों के पिता थे. तमिलनाडू सरकार ने उनके परिवार को 20 लाख रुपए की आर्थिक मदद और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है.

शाहदत प्राप्त करने वाले वीर भारतीय जवान