इज्ज़त लूटने वालों के लिए मौ#त की सज़ा को मिली मंजूरी, अध्यादेश लेकर आया कानून

इज्ज़त लूटने वालों के लिए मौ#त की सज़ा को मिली मंजूरी, अध्यादेश लेकर आया कानून

देश और दुनिया से दु’ष्क’र्म के मामले आम होते जा रहे है, हर दिन, हर घंटे किसी ना किसी महिला को है#वा’निय’त का सामना करना पड़ रहा है. यह घ’टना’एँ बताती हैं कि इन्सान है#वा’न का रूप लेता जा रहा है. दु’ष्क’र्म के मामले सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में देखने को मिलते रहे है. हाल ही में भारत में हाथरस में हुई घ’ट’ना के बाद देशभर में आ’क्रो’श देखने को मिला.

लेकिन असल में यह मामला तो देश भर में होने वाले हजारों मामलों में से एक था. आज गलत सोच वाले लोग कानून से बै’खोफ होकर अपनी है#वा’निय’त का शिकार मामूम बच्चों को भी बना रहे है.

इसी बीच भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश ने अपने जहाँ के कानून में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया हैं जिसके बाद दु’ष्क’र्म करने वालों की खेर नहीं होगी. दरअसल बांग्लादेश ने रे# प के मामलों में स जा-ए-मौ#त देने वाले कानून को लाने का फैसला किया है.

अब इस देश में अगर रे# प का आरो’प साबित हो जाता हैं तो सीधे मौ#त की स जा मिलेगी. दु’ष्क’र्म के मामलों में अब अधिकतम स जा को बढ़ाकर मौ#त की स’जा कर दी गई है, इससे पहले ऐसे मामलों में अधिकतम स’जा उम्र कै’द ही थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद ने इस संदर्भ वाले अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया, जिसके बाद अब दु’ष्क’र्म मामलों में अधिकतम स’जा को उ’म्रकै’द से बदलकर मौ#त की स’जा में त’ब्दी’ल कर दिया गया हैं.

बीडीन्यूज24 की रिपोर्ट के मुताबिक महिला और बाल उ’त्पी’ड़न रोकथाम अधिनियम में संशोधन को सोमवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी थी जिसके बाद इसे राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिल गई है. इसी के साथ अब यह अध्यादेश लागू हो गया है.

दरअसल बांग्लादेश की हसीना सरकार ने यह कदम हाल ही के दिनों में नोआख’ली और सयालहट के एमसी कॉलेज से सामने आई घ’ट’नाओं के बाद उठाया है. यहां पर युवतियों के साथ यौ#न दु’र्व्य’वहा’र और दु’ष्क’र्म के मामले सामने आए थे.

जिसके बाद ढाका के शाहबाग स्क्वायर एवं पूरे देश में विभिन्न सं’गठ’नों ने जमकर वि’रो’ध प्रदर्शन किये थे. बीते 16 वर्षो के दौरान बांग्लादेश में दु’ष्क’र्म के 4541 मामले प्रकाश में आए हैं जबकि इनमें से महज 60 मामलों में ही आरोपियों को स#जा हो पाई हैं.

साभार- बीडीन्यूज24