भारत के 120 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को 'मुस्लिम रेजिमेंट' को लेकर लिखा ख़त

भारत के 120 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ‘मुस्लिम रेजिमेंट’ को लेकर लिखा ख़त

भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल रामदास समेत भारत के क़रीब 120 सेवानिवृत्त सै’न्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के मु’स्लिम रेजिमेंट को लेकर चल रही फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने और उन्हें फ़ैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. दरअसल सोशल मीडिया पर मुस्लिम रेजिमेंट को लेकर कई तरह की गल’त खबरें फैलाई जा रही हैं.

अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार राष्ट्रपति कोविंद से भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट को लेकर फैलाई जा रही झूठी खबरों को रोकने और उन्हें फैलाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग उठाई गई हैं.

एडमिरल रामदास समेत भारत के क़रीब 120 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए इस खत में बताया गया है कि इन दिनों सोशल मीडिया पर एक झूठ फैलाया जा रहा है, यह झूठ साल 2013 से ही लगातार कई मौ’कों पर फैलाया जा है.

सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि साल 1965 के भारत-पाकिस्तान जं#ग के दौरान भारतीय सेना की मुस्लिम रेजिमेंट ने पाकिस्तान के खिला’फ ल’ड़ने से म’ना कर दिया था और अपने हथि’या’र तक डाल दिये थे.

ख़त में कहा गया है कि जबकि सच्चाई यह हैं कि इस तरह का कोई रेजिमेंट भारतीय सेना में कभी रहा ही नहीं हैं लेकिन इसके बाद भी कई मौ’कों पर यह फेक न्यू’ज़ ध’ड़ल्ले के साथ फैलाई जा रही हैं.

इस झूठ को खास तौर पर ऐसे वक्त में फैलाया जाता हैं जब भारत अपने दोनों पड़ो’सि’यों पाकिस्तान और चीन से त’नावपू’र्ण संबं’ध को लेकर चर्चा में होता हैं.

इस ख़त में लेफ़्टिनेंट जनरल अता हसैन (सेवा नि’वृ त्त) के एक ब्लॉग का जिक्र भी किया गया है जिसमें उन्होंने शक जाहिर करते हुए कहा हैं कि वो यह फेक न्यूज़ पाकिस्तानी सेना के साई ऑप्स  म’नो वैज्ञा’निक ऑपरेशन का हिस्सा भी हो सकती हैं.

इस खत में भारतीय सेना के ग़ैर-राजनीतिक और धर्मनिरपे’क्ष च’रि’त्र की रक्षा करने की आवश्यकताओं को बल देते हुए इस मामले में तुरंत और कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है. साथ ही राष्ट्रपति से फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्ले’टफ़ॉ’र्म को भी इस खबर को लेकर चेताव’नी जारी करने की अपील की गई है.

इस पत्र में कहा गया है कि इस तरह की गलत सोशल पोस्ट से लोगों के दिमाग़ में शक के बीज उत्पन्न होते हैं कि अगर मुस्लिम सैनिकों पर भरोसा नहीं किया जा सकता हैं तो फिर यह दुसरें मुस्लिम भी उनसे अलग थो’ड़ी होगें. खत के मुताबिक इस तरह की फे’क न्यूज़ समुदायों के बीच अविश्वा’स और नफ़रत बढ़ता है.

साभार- बीबीसी