अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP में सबसे बड़ी गिरावट, उल्टा घूमा ग्रोथ का पहिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था ने अपने इतिहास का सबसे बुरा दौर देख लिया हैं. पहले से गिरती अर्थव्यवस्था और जीडीपी को कोरोना वायरस ने और जोर से गिरा डाला हैं. कोरोना से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने जीडीपी पर बेहद ही विपरीत असर डाला हैं और ग्रोध का पहिया उल्टा घूम पड़ा हैं. वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9% की रिकॉर्ड कमी देखने को मिली हैं.

1996 में वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद से यह पहला अवसर हैं जब जीडीपी के तिमाही नतीजों में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई हैं. बता दें कि साल 1996 से ही देश में जीडीपी के तिमाही नतीजे घोषित करने का चलन शुरू हुआ था. वहीं बीते साल इसी अवधि के दौरान जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी थी.

इसके अलावा इसी वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानि जनवरी-मार्च के दौरान जीडीपी की रफ्तार 3.1 पर्सेंट थी, जो बीते 8 सालों में सबसे निचला स्तर रहा था. इस हिसाब से देखा जाए तो कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन ने भारत की जी़डीपी पर बुरी तरह कहर बरपाया है. मौजूदा तिमाही और इस पुरे साल इसका असर देखने को मिल सकता हैं.

वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जीडीपी के आंकड़े सार्वजिनक करते हुए कहा कि कोरोना संक’ट के चलते निजी निवेश में तेजी से कमी देखने को मिली हैं और उपभोक्ता में गिरावट आई हैं. इसी के कारण से जीडीपी ने विपरीत दिशा में गोता लगा दिया है.

देश की जीडीपी जून तिमाही के दौरान 26.9 लाख करोड़ रुपये रही है जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 35.35 लाख करोड़ रुपये का था.

इस तरह पिछले साल की तुलना में देखा जाए तो जीडीपी ग्रोथ में 23.9 पर्सेंट की कमी दर्ज हुई हैं. आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान देश में अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के उद्देश्य से करीब 21 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था.

लेकिन जीडीपी का यह चौंकाने वाला आंकड़ा बताता है कि सरकारी उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर लोगों का भरोसा नहीं बढ़ा है. दरअसल लोगों की मानें तो यह राहत पैकेज सिर्फ बयानों में ही नजर आया, इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर देखने को नहीं मिला.