भाजपा उम्मीदवार की कार में मिली ईवीएम, देशभर में एक बार फिर चर्चा में आई EVM की हेराफेरी

दिल्ली: असम में एक भाजपा उम्मीदवार की कार में ईवीएम मिलने के बाद, देशभर में एक बार फिर से EVM मशीन में हेरा फेरी होने की चर्चा होने लगी है. दरअसल असम के करीमगंज मैं इस तरह का मामला सामने आया है, हालांकि इस मामले में चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है.

असं में हुआ यह था कि यह ईवीएम जिस गाड़ी में मिली है, वह खुद एक भाजपा उम्मीदवार की कार है. इस तरह की बातें सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि इस कार में EVM लायीं या ले जाई गयीं है. मीडिया में खबरों के अनुसार जानकारी है कि सड़क के किनारे कोई लावा’रिस बोलेरो मिली थी, जिसमें एक ईवीएम मशीन मिली है.

असम में मिली ईवीएम का विडियो देशभर में वायरल

EVM Masheen Ka Viral Video

बीते गुरुवार को ही, आसाम में दूसरे चरण का मतदान पूरा हुआ था. बताया जा रहा है कि यहां 74.96 फ़ीसदी वोटिंग हो चुकी है. इस ईवीएम मशीन की खबर के साथ, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर कहा जा रहा है कि यह किसी भाजपा उम्मीदवार की कार है और उसमें ईवीएम मशीन मिली है.

कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, यह वीडियो वायरल हो चुका है. इसके बाद सभी राष्ट्रीय दलों ने भी ईवीएम की उपयोगिता को लेकर चुनाव आयोग से यह मांग है कि ईवीएम मशीन के ज़रिये वोटिंग और इसकी सच्चाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

सोशल मीडिया पर अक्सर लोगों द्वारा, ईवीएम में हेराफेरी की जाने की चर्चा रहती है. कांग्रेस की अध्यक्ष प्रियंका गांधी ने भी एक वीडियो साझा करते हुए सवाल खड़े किए हैं, कि यह तो आम बात है भाजपा पार्टी अपनी मीडिया मशीनरी का गलत तरीके से इस्तेमाल करके, ऐसे लोगों को आरोपी बनती है, जिन्होंने इस तरह की घट’नाओं का खुलासा किया है.

लोगों को नहीं रहा अब ईवीएम मशीन पर भरोसा

और सच तो यह है कि इस तरह की और भी कई घट’नाओं कि सूचना पहले से और बाद में चुनाव आयोग को दी जा रही है, लेकिन कहीं भी कुछ कार्यवाही नहीं हो रही है.

इधर बंगाल में भी पहले ही चरण की वोटिंग के दौरान से, ईवीएम खराब होने की खबरें आती रही हैं, जो दूसरे चरण में भी देखने को मिली.

इस देश के वोटर का एक बड़ा भाग ईवीएम मशीन को सही नज़र से नहीं देखता. विपक्ष को सपोर्ट करने वाले वोटर हमेशा से ही ईवीएम पर विश्वास नहीं करते है. उनका इस तरह से मानना है कि ईवीएम से दिया गया उनका वोट वे जिसको दे रहे हैं, उसको ही जाए इस बात की गारंटी नहीं है.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।