फिर से एक हो सकता है यादव का परिवार, चाचा-भतीजे में घटी कड़वाहट शिवपाल ने दिए ये संकेत

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली समाजवादी पार्टी पिछले कुछ चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी हैं. इसके पीछे की एक प्रमुख वजह हमेसा परिवार में छिड़ रहा संग्रा’म माना जाता रहा हैं. दरअसल समाजवादी के अध्यक्ष अखिलेश यादव व उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच काफी कड़वाहट है जिसके चलते पार्टी दो गुटों में बढ़ गई हैं. शिवपाल यादव ने सपा से अलग हो कर अपनी खुद की पार्टी बना ली हैं.

लेकिन अब अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के रिश्तों में कड़वाहट कुछ कम होती नजर आ रही हैं. कुछ ही दिनों पहले अखिलेश ने शिवपाल यादव की विधानसभा से सदस्यता रद करने वाली पार्टी की याचिका वापस ले ली हैं. इसे चाचा-भतीजे के रिश्ते में सुधार की दिशा में अखिलेश का एक कदम माना गया.

वहीं अखिलेश के इस कदम पर शिवपाल यादव ने अपने भतीजे को पत्र लिखकर उनकी तारीफ की साथ ही उनका आभार भी जताया है. इस तरह दोनों की तरफ से उठाए गए इन क़दमों से संकेत मिल रहे है कि अब शिवपाल की सपा में वापसी का रास्ता साफ हो सकता हैं.

शिवपाल द्वारा अखिलेश को लिखे गए पत्र में उन्होंने लिखा कि आपके आग्रह पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मेरी विधानसभा सदस्यता को समा’प्त करने के लिए दी गई आपकी याचिका को वापस कर दिया गया है. इस स्नेह पूर्ण विश्वास के लिए आपका कोटिश: आभार.

उन्होंने लिखा कि निश्चिय ही यह सिर्फ एक राजनीतिक परिघटना नहीं बल्कि आप इस तरह के स्पष्ट सार्थक व सकारात्मक हस्तक्षेप से राजनीतिक गलियारों में आपके नेतृत्व में एक नव-राजनीतिक विकल्प व नवाक्षर का जन्म हैं.

आपको बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा में वर्चस्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. सपा पर अखिलेश ने एकछत्र राज कायम कर लिया था. जिससे नाराज चाचा शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच खाई बन गई.

विधानसभा चुनाव के बाद शिवपाल की नाराजगी और बढती चली गई और उन्होंने सपा छोड़ दी और अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया.

सपा से अलग होकर पार्टी बनाने के बाद सपा के नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी से चार सितंबर 2019 को शिवपाल यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए दल-बदल कानून के तहत याचिका दायर की और कार्रवाई की मांग की.

जिसके बाद अखिलेश यादव ने 23 मार्च 2020 को याचिका वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दयार किया. जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने याचिका वापस कर दी और शिवपाल यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द होने से बच गई. इसी के बाद से माना जा रहा है कि मौजूदा हतालों को देखते हुए शिवपाल भतीजे के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हैं.