हाथरस कांड: SP, DSP और इंस्पेक्टर के सस्पेंड होने पर IPS एसोसिएशन भड़का?, बताया बलि का बकरा

हाथरस कांड: SP, DSP और इंस्पेक्टर के सस्पेंड होने पर IPS एसोसिएशन भड़का?, बताया बलि का बकरा

उत्तरप्रदेश के हाथरस कां’ड पर चौतरफा घिर चुकी योगी सरकार ने कार्रवाई करते हुए कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिए है. खबरों के अनुसार सीएम योगी ने हाथरस के एसपी, डीएसपी व इंस्पेक्टर को निलं’बित कर दिया है. इतना ही नहीं संबंधित पुलिस अफसरों का नार्को टेस्ट कराए जाने की बात भी सामने आई है. इससे पहले माना जा रहा था कि डीएम प्रवीण कुमार और एसपी विक्रांत वीर दोनों पर कार्रवाई हो सकती हैं.

लेकिन योगी सरकार ने एसपी विक्रांत वीर को सस्पेंड किया है जबकि डीएम पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. हाथरस एसपी विक्रांत की जगह अब एसपी शामली विनीत जयसवाल की नियुक्ति की गई है. वहीं डीएम द्वारा पी’ड़ि’त परिवार को धम’का’ने के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर डीएम के खिलाफ काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है.

यूपी की योगी सरकार की इस कार्रवाई पर आईपीएस एसोसिएशन ने भी नाराजगी जाहिर की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एसपी समेत कुछ पुलिस अधिकारीयों पर हुई इस कार्रवाई पर एसोसिएशन ने नाराजगी जताते हुए पुलिस को बलि का बकरा बनाए जाने की बात कहीं है.

एबीपी न्यूज़ के एडिटर और पत्रकार प्रशांत झा ने एक ट्वीट में यह जानकारी दी है. प्रशांत ने अपने ट्वीट में लिखा कि हाथरस के एसपी विक्रांत वीर को संस्पेंड किये जाने और हाथरस डीएम प्रवीण कुमार पर कोई कार्रवाई नहीं होने के चलते यूपी के नए आईपीएस अफसरों में बहुत नाराजगी है.

झा ने बताया कि आईपीएस अफसरों ने अपने एसोसिएशन के ग्रूप चैट में लिखा कि सूबे में जब भी कुछ होता है तो पुलिस अफ़सरों को बलि का बकरा बनाया जाता है. जबकि हाथरस मामले में सारे फ़ैसले DM द्वारा लिए गए थे.

वहीं यूपी सरकार के इस फैसले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने योगी सरकार पर निशाना साधा है. प्रियंका वाड्रा ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि मोहरों के निलंबन से क्या होगा?

शुक्रवार को हाथरस के कथित सामूहिक बला’त्का’र के मामले में पुलिस अधिकारियों के निलंबन पर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मोहरों के निलंबन से क्या होगा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा देना चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने मांग करते हुए कहा कि हाथरस के जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक के सभी कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक किये जाना चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि किसके इशारों और आदेशों के आधार पर पी’ड़ि’ता एवं उसके परिवार को क’ष्ट दिए जा रहे हैं.

साभार- जनसत्ता