Chinese Apps Ban के बाद लोग पूछ रहे सरकार से सवाल- 40 फीसदी चीनी हिस्सेदारी वाली पेटीएम जैसी कंपनियों पर बैन कब

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अलग-अलग तरह के 59 मोबाइल एप को देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पूर्वाग्रह रखने वाला बताते हुए उन्हें बैन कर दिया है. जिनमें टिकटॉक, शेयरइट और वीचैट जैसे बड़े और पॉपुलर चाइनीस एप्प शामिल है. एप पर प्रतिबंध को लेकर सोशल मीडिया समेत हर जगह से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियां सामने आ रही है. इसी बीच कांग्रेस प्रवक्ता पद से हटाए आ चुके संजय झा ने प्रतिक्रिया दी हैं.

संजय झा ने ट्वीट करके पूछा कि क्या केंद्र की मोदी सरकार पेटीएम पर भी बैन लगाएगी? उन्होंने कहा कि पेटीएम में 40 फीसदी हिस्सेदारी चीनी कंपनी अलीबाबा की है और पेटीएम के 15 करोड़ भारतीय यूजर हैं.

इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. बरखा ने कहा कि भारत 70 फीसदी दवा थोक में चीन से आयात करता हैं. यह वास्तविकता है कि हमने किस तरह से चीन को भारत में घुसपैठ करनी दी है. जबकि पाकिस्तान आ’तंकि’यों को भेजकर ऐसा करता है.

आपको बता दें कि चीन के 59 एप्स पर प्रतिबंध लागू करने के फैसले को व्यापारियों के संगठन कैट और स्वदेशी सोशल मीडिया एप शेयरचैट समेत कई क्षेत्रों से समर्थन हासिल हो रहा है.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बयान जारी करके कहा कि भारत सरकार के 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाने का यह फैसला उसके चीन के सामान का बहिष्कार अभियान के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण समर्थन है.

कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने अपने बयान में कहा कि सरकार के इस अभूतपूर्व कदम से कैट द्वारा चलाए जा रहे चीन का बहिष्कार अभियान को मजबूती मिलेगी. चीन का बहिष्कार आंदोलन अब सच में एक राष्ट्रीय वास्तविकता है, देश के सात करोड़ व्यापारी केंद्र सरकार के इस फैसले के साथ एकजुटता से खड़े हैं.

वहीं शेयरचैट के निदेशक (सार्वजनिक नीति) बर्जेस मालू ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर रूप से जोखिम बन चुके इन प्लेटफार्मों के खिलाफ केंद्र सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है.  उन्होंने कहा कि हमें आशा है कि सरकार भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को अपना समर्थन जारी रखेगी.

साभार- जनसत्ता