NCERT की नकली किताबों को लेकर गरमाई राजनीति तो हुआ चौंकाने वाला खुलासा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हाल ही में बीजेपी नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता के  टीएनएचके पब्लिकेशन की गोदाम पर छापेमारी की गई थी. अब इस मामले में चौंका देने वाली खबर सामने आई है, बताया जा रहा है कि करीब 500 करोड़ से भी अधिक कीमत की एनसीईआरटी की नकली किताबें बीजेपी नेताओं द्वारा अब तक छापी जा चुकी हैं. इन सभी किताबों की छपाई गुप्त रूप से टीएनएचके पब्लिकेशन में की गई.

नई दिल्ली से एनसीईआरटी की टीम जांच के लिए मेरठ पहुंची हैं, टीम ने अंदेशा जताया है कि यहां नकली किताब छपने का कारोबार काफी लंबे समय से फल-फूल रहा था.

वहीं पुलिस के अनुसार परतापुर के अच्छरौंडा गांव में स्थित एक गोदाम को करीब डेढ़ साल पहले किताबों को रखने के लिए किराए पर लिया गया था. इस गोदाम के अलावा मोहकमपुर स्थित फैक्टरी को भी परतापुर पुलिस और एसटीएफ ने सील कर दिया है.

वहीं एनसीईआरटी टीम ने दावा करते हुए कहा है कि काफी लंबे समय से इन मशीनों से नकली किताबें छापी जा रही हैं. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या अच्छरौंडा गांव में सिफ्ट होने से पहले कहीं दूसरी जगह भी एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का धंधा चल रहा था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शहर में यही एक मात्र प्रिंटिंग प्रेस संचालक ऐसा हैं जो हर साल होली दीपावली और अन्य त्योहारों पर स्कूलों में शिक्षकों से लेकर स्कूल प्रबंधन तक सभी को महंगे उपहार देता था. स्कूल को अपने साथ जोड़ कर रखने के लिए उपहार दिये जाते थे.

इसके आलावा कई शिक्षकों को महंगे तोहफे दिये जाते हैं और बदले में शिक्षक को छात्रों को रेफरेंस के लिए उनकी किताबों को खरीदने के लिए बाध्य करना होता था. नकली किताबों का एक पूरा नेटवर्क बना हुआ था जो मोटा मुनाफा कामता था.

एसटीएफ ने छापेमारी में मेरठ और गजरौला में 18 लाख एनसीईआरटी की नकली किताबें बरामद की हैं. जांच में पाया गया है कि यह किताबें सत्र 2020 की ही हैं.

सूत्रों के अनुसार मेरठ और गजरौला से करीब 56 लाख नकली किताबें यूपी व अन्य दूसरे राज्यों में इस सत्र में ही खपाई गई हैं. एसटीएफ की जांच में पाया गया है कि करीब नौ साल से ये गिरोह कई स्थानों पर एनसीईआरटी की नकली किताबें छाप रहा था. ऐसा माना जा रहा है कि यह गिरोह करीब 8-9 साल के दौरान छह करोड़ किताबें छाप चुका है.