कोरोना संकट: घर लौट रहे मजदूरों को लेकर सोनिया गांधी ने किया बड़ा ऐलान

देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर 1 मई को जब यह ख़बर आई कि गृहमंत्रालय ने मज़दूर दिवस के मौके पर स्पेशल चलाने का फ़ैसला लिया है. यह ख़बर न तो बताई गई और न ही किसी ने जानने का प्रयास किया कि श्रमिक स्पेशल में मुफ्त यात्रा होगी या मज़दूरों से किराया लिया जाएगा। न ही पत्रकारों ने गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन में किराये की लिखी हुई बात पर ज़ोर दिया।

गृहमंत्रालय ने जिस नोटिफिकेशन में एलान किया था कि श्रमिक स्पेशल चलेगी उसमें लिखा था कि रेलवे पैसा लेगी जिसपर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को बयान जारी कर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि विदेश में फंसे भारतीयों को मुफ्त में जहाज से भारत वापस लाया गया लेकिन कामगारों से किराया वसूला जा रहा है।

इसी को देखते हुए उन्होंने फैसला लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक और कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी और जरूरी कदम उठाएगी।

सोनिया गांधी ने कहा है, श्रमिक व कामगार देश की रीढ़ की हड्डी हैं. उनकी मेहनत और कुर्बानी राष्ट्र निर्माण की नींव है. सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाऊन करने के कारण लाखों श्रमिक व कामगार घर वापस लौटने से वंचित हो गए।

1947 के बंटवारे के बाद देश ने पहली बार यह दिल दहलाने वाला मंजर देखा कि हजारों श्रमिक व कामगार सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर वापसी के लिए मजबूर हो गए. न राशन, न पैसा, न दवाई, न साधन, पर केवल अपने परिवार के पास वापस गांव पहुंचने की लगन थी।

उनकी व्यथा सोचकर ही हर मन कांपा और फिर उनके दृढ़ निश्चय और संकल्प को हर भारतीय ने सराहा भी. पर देश और सरकार का कर्तव्य क्या है? आज भी लाखों श्रमिक व कामगार पूरे देश के अलग अलग कोनों से घर वापस जाना चाहते हैं, लेकिन न साधन है, और न पैसा. दुख की बात यह है कि भारत सरकार व रेल मंत्रालय इन मेहनतकशों से मुश्किल की इस घड़ी में रेल यात्रा का किराया वसूल रहे हैं।

सोनिया ने कहा, कांग्रेस ने कामगारों की इस निशुल्क रेलयात्रा की मांग को बार-बार उठाया है. लेकिन सरकार ने एक न सुनी और न ही रेल मंत्रालय ने। इसलिए कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी।

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