VIDEO: कोरोना महामारी के बीच मुस्लिमों ने स्वर्ण मंदिर में लंगर के लिए दान किया 330 क्विंटल अनाज

दुनिया में तेजी से बढ़ रही कोरोना महामारी का कहर दुनिया भर में देखने को मिल रहा है. अब तक यह बीमारी लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी हैं. कोरोना के चलते देश की अर्थव्यवस्था भी डगमगाने लगी है. भारत में भी इसका बहुत अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है. देश में लंबे समय से लागू लॉकडाउन ने रोजगार को भी धवस्त कर दिया है. इसके चलते लोग भूख से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं.

इस भारी संक’ट के बीच सिख-मुस्लिम एकता की एक और अनूठी मिसाल देखने को मिली हैं. दरअसल अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर के सामुदायिक रसोई गुरु राम दास लंगर को स्थानीय मुस्लिमों ने  330 क्विंटल अनाज दान किया हैं.

इस दौरान सिखों ने स्वर्ण मंदिर में मुसलमानों का शानदार तरीक़े से स्वागत भी किया. जानकारी के अनुसार पंजाब का एकमात्र मुस्लिम बाहुल्य कस्बा मालेरकोटला सिख-मुस्लिम एकता की लंबे समय से प्रतीक बना हुआ है.

आपको बता दें कि जब 1947 में बंटवारे के दौरान पूरा पंजाब जल रहा था, तब भी मालेरकोटला कस्बे के किसी भी मुसलमान को कोई आंच नहीं आई थी. लंबे समय से चली जा रही यह सिख-मुल्सिम एकता आज भी उसी तरह से कायम है.

जानकारी देते हुए सिख मुस्लिम सांझा संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर नसीर अख्तर ने कहा कि स्वर्ण मंदिर में होने वाले लंगर के दौरान हर दिन एक लाख लोग खाना खा रहे है. ख्तर ने कहा कि एक लाख लोगों को खाना खिलाने के लिए 330 क्विंटल गेहूं काफी कम है.

लेकिन हम लंगर चलाने में किसी तरह की कोई भी दिक्कत ना आए इसके लिए और अनाज जुटाने के प्रयासों में लगे हुए हैं. संगठन से जुड़े मोहम्मद परवेज ने बताया कि मालेरकोटला में रहने वाले मुस्लिमों ने दिल खोलकर दान किया है और २२ दिनों के अंदर 330 क्विंटल गेहूं जमा हो गया.

बता दें कि गेहूं के ट्रकों को दुबई में रहने वाले कारोबारी सुरिंदर पाल सिंह ओबरॉय और तख्त पटना साहिब के जत्थेदार रंजीत सिंह ने रवाना किया. वहीं जब मुस्लिम गेहूं के ट्रक लेकर स्वर्ण मंदिर पहुंचे तो उनका सिखों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया और उन्हें लंगर भी खिलाया गया.

इतना ही नहीं आखिर में जब मुस्लिमों ने विदाई ली तो उस वक्त सभी को स्वर्ण मंदिर का चिन्ह भी तोहफे के रूप में प्रदर किया गया, गेहूं भेंट करने पहुंचे लोगों को दरबार साहिब के मैनेजर मुखतार सिंह व अतिरिक्त मैनेजर रजिंदर सिंह रूबी ने सम्मानित भी किया.

साभार- एनडीटीवी