कोरोना दुनिया के तमाम देशों से होते हुए भारत पहुंचा और भारत आते ही उसे इस्लाम कुबूल करा दिया गया, देखें कैसे

शायद आपको यह न्यूज़ भले ही आपको एक मज़ाक लगे, लेकिन यह सच है कि जिस तरह से एक बेहद ही गंभीर मुद्दे पर जब मीडिया को सरकारों से सवाल करना चाहिए, ऐसे में वह लोग हिंदू-मुसलमान करने के लिए लगे हुए हैं. हालांकि हम यह नहीं कहते कि लोगों को ग्रुपों में इकठ्ठा किया जाये, या किसी धार्मिक स्थल पर भीड़ हो. फ़िलहाल लोगों को हुजूम लगाने से बचना चाहिए. अधिकतर लोग ये कर भी रहे हैं.

जबकि यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि जिस तरह से दिल्ली के निज़ामुद्दीन में स्तिथ मरकज़ के अंदर, लोग फंसे हुए थे ठीक उसी तरह से और भी कई धार्मिक स्थलों पर लोग इसी तरह से फंसे हुए हैं. देश की इसी दोगली मीडिया ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों से जो मजदूरों ने पलायन किया था उस खबर पर सरकार की नाकामी पर सवाल खड़े नही किये.

आज देखने से ऐसा लग रहा है कि भारत में कोरोनावायरस का अस्तित्व खत्म हो चुका है, अब बचा है तो केवल मुसलमान. जिसके पीछे भारतीय मीडिया हाथ धोकर पड़ी हुई है.

मीडिया के कुछ एंकर और उनके ऐसे-ऐसे बोल जिनको सुनकर किसी का भी खून खौ’ल उठे, ये सभी लोग वह तमाम हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे अवाम का ध्यान सिर्फ इसपर जाय कि इस देश में कोरोना फैलने की वजह सिर्फ-और-सिर्फ मुसलमान है.

ऐसे नाज़ुक माहौल में भी ये लोगों में जागरूकता फैलाने और उन्हें समझाने के वजाय, किसी खास एक वर्ग को कटघरे में खड़ा करके उस पर सारा इलज़ाम डाल रहे हैं. ऐसा लगे जैसे हिंदुस्तान में सिर्फ इन्हीं की वजह से कोरोनावायरस आया है.

सोशल मीडिया पर भारतीय मीडिया के इस दोहरे चरित्र का कुछ समझदार लोगों द्वारा कैसे बखान किया जा रहा है एक नज़र ज़रा यह भी देखें.

Moin Shaikh

मोईन शैख़ अपनी फेसबुक पर निष्पक्ष पोस्ट शेयर करने के लिये मशहूर हैं. चाहे कोई भी विषय हो वो अपनी वाल पर सुबह से लेकर देर रात तक आपको सभी तरह की न्यूज़ के अपडेट देते रहते हैं.

मोईन शैख़ अपनी वाल पर पोस्ट करते हैं,  कई दिनों के बाद आज मीडिया के सभी एंकरों के चेहरे पर ख़ुशी देखने को मिल रही है. लगता है जैसे इससे पहले मीडिया वालों को कोई काम नहीं था.

sandeep bhi

इधर एक फेसबुक ग्रुप में संदीप नाम के यूज़र लिखते हैं, सारी दुनिया कोरोना का इलाज ढूँढ रही है लेकिन, भारतीय मीडिया कोरोना में मुसलमान ढूँढने में लगी हुयी है.

एक फेसबुक यूज़र अनीता संजीव लिखतीं हैं, ‘मज़दूर जो भूख प्यास के मारे सड़क पर दर दर भटक रहे उनकी भूख पर हावी मरकज़ मुद्दा हो गया, ज़रा उनकी भी खबर ले लो”. क्यूंकि इस भसड में मीडिया ने ज़रूरी मुद्दों को गोल कर दिया है.

दोस्तों, दुनिया भर में जॉर्नलिस्म का मतलब होता है कि वो देश हित में ज़रूरी मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछे, लेकिन यहाँ भारतीय जर्नलिज्म का मतलब हो रहा है मुसलमानों की खाल खीचें. इतना दोगलापन कैसे चलेगा रे भाई?.

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