कोरोना वायरस के चलते फीका पड़ा बकरीद का रंग, बकरे विक्रेताओं को नहीं मिल रहे खरीदार, छलका दर्द कहा- 20 हजार के बकरे के मिल रहे सिर्फ….

देश भर में घातक महामारी फैली हुई हैं जो थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं. देश में हर रोज कोरोना के हजारों नए केस सामने आ रहे हैं. इस वायरस के कारण म’रने वालों की संख्या 30 हजार को पार कर चुकी हैं. कोरोना वायरस ने लोगों के दिलों में दह’शत बना दी हैं जिसका असर त्यौहारों पर भी देखने को मिल रहा हैं. अगस्त के पहले ही दिन बकरीद का पर्व मनाया जाना हैं लेकिन इस बार कोरोना के चलते ईद रंग काफी फीका नजर आ रहा है.

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच बकरा बेचने वालों ने बताया कि इस बार की बकरीद आम सालों से कितनी अलग है. यूपी के बरेली से दिल्ली के जामा मस्जिद के पास की प्रसिद्ध बकरा मंडी में दो हफ्ते पहले बकरे बेचने आए शकील खान ने बताया कि उन्हें ईद से एक हफ्ते पहले भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा है.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शकील खान ने बताया कि वो अपने मालिक के बकरे बेचने के लिए दिल्ली आए हैं, उन्हें खाने-पीने के लिए मालिक ने जो पैसे दिये थे अब तो वो भी ख’त्म होने की कगार पर आ चुके है. खान जामा मस्जिद के पास उर्दू बाजार रोड पर बंद दुकानों के बाहर अपनी रात गुजारने को मजबूर हो चुके है.

खान ने कहा कि अगर मेरे कुछ बकरे भी बिक जाते तो मैं पास में कहीं बसेरे की व्यवस्था कर लेता. इसी दौरान आए एक ग्राहक ने कहा कि कोरोना ने करोबार और लोगों पर इस हद तक प्रभाव डाला है कि जो लोग पिछले साल तक चार बकरे ख़रीदा करते थे वो अब एक भी नहीं खरीद पा रहे है.

खान और ग्राहक के बीच बात नहीं बनी और यह भी बिना बकरा खरीदें चला गया. खान ने बताया कि मालिक ने एक जोड़े बकरों की कीमत 30,000 रुपये तय की है और हर बकरे का वजन 40 किलो है, इसलिए यह कीमत एकदम सही है.

खान पिछले पांच साल से इस बाजार में बकरे बेचने आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले साल मैंने 1.6 लाख रुपये में आठ बकरे बेचे थे और हर बकरे की कीमत 20,000 रुपये थी. लेकिन इस साल कोई भी ग्राहक 10,000 रुपये से ज्यादा की पेशकश नहीं कर रहा है.

मार्केट के पास बनी एक दुकान के मालिक जैद मलिक ने बताया कि कोरोना के चलते प्रशासन ने बकरों की बिक्री की परमिशन नहीं दी है. पिछले साल तक यहां बहुत भीड़ होती थी लेकिन इस बार आप लोगों को अंगुलियों पर गिन सकते हैं.

मोहम्मद इजहार ने बताया कि वो हर साल कुर्बानी के लिए करीब 15-20 बकरे बेचते रहे हैं. लेकिन इस बार ईद-उल-अजहा के इतने करीब आने के बाद भी वो सिर्फ एक जोड़ी बकरे बेच सके है. वो कहते है कि हमने कीमतें कम कर दी है, मैंने 18,000 रुपये तय किए थे लेकिन ग्राहक 15,500 रुपये से ज्यादा देने को तैयार नहीं दे तो हमें नुकसान उठाना पड़ा.

आजादपुर के रहने वाले इजहार ने कहा कि अगर वायरस नहीं होता तो हमें एक जोड़े के कम से कम 30 से 35 हजार रुपये मिलते. उन्होंने कहा कि एक बकरे को तैयार करने में हमें 18 महीने का वक्त लगता है.

उसकी देखरेख में बहुत खर्च होता है, उन्हें खाने में गेहूं, चना, मक्का और जौ आदि दिए जाते है जिन पर 10,000 रुपये तक का खर्च आता है. विक्रेताओं ने कहा कि अगर इस साल बकरे नहीं बिकते है तो हम उन्हें अगले साल के लिए रखेंगे.

साभार- पीटीआई