अरविंद्र केजरीवाल की नाक के नीचे विधायक ने पानी टैंकर से रिश्वत में वसूले 60 लाख रुपये

आम आदमी पार्टी लगातार ईमानदारी और सच्चाई के दावे करती है और दूसरी तरह पार्टी नेता और प्रतिनिधि ही इन दावों की हवा निकाल देते है. ऐसा ही कुछ एक बार फिर से हुआ है. जहां दिल्ली के सीएम केजरीवाल अपनी ईमानदारी और जनता के प्रति अपने समर्पण की बड़ी-बड़ी बातें करते है वहीं उन्हीं के पार्टी के एमएलए केजरीवाल की नाक के नीचे रिश्वतबाजी कर रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के देवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रकाश जारवाल पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए है. जारवाल पर पानी टैकरों के मालिकों से 60 लाख रूपये रिश्वत के रूप में वसूलने के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद अब विधायक की मुश्किलें बढती नजर आ रही है. दरअसल दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इन आरोपों को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया है कि प्रकाश जारवाल ने एक महीने में लगभग 60 लाख रुपये रिश्वत के रूप में पानी के टैंकर मालिकों से लिए हैं. 20 पानी टैंकर मालिकों ने इसे लेकर बयान दिए है. उन्होंने दावा किया है कि विधायक प्रकाश ने उन से पैसे की मांग की थी. इनमें से चार टैंकर मालिकों के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जा चुके है.

उन्होंने बताया कि अपनी फाइल को मंजूरी दिलाने के लिए हम से 20,000 रुपये की डिमांड की गई जिसका हमने भुगतान किया और फिर आपूर्ति के प्रत्येक दौर के लिए 500 रुपये दिए गए. दिल्ली में इस तरह के 60 टैंकर संचालित किए जाते है जिन से हर महीने 60 लाख रुपये वसूल किये जाते थे.

हाल ही में देवली में अपने घर में ही आ’त्मह’त्या करने वाले डॉ. राजेन्द्र सिंह से जारवाल के सहयोगी कपिल ने 10 लाख रुपये लिए थे. इसके आगे की राशि का भुगतान करने से राजेंद्र ने इनकार कर दिया था जिसके चलते जारवाल और राजेंद्र में झगड़ा हो गया था. राजेंद्र के परिवार ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भुगतान के सबूत भी पेश किये.

टैंकर मालिकों ने दावा करते हुए कहा कि अगर वह समय पर भुगतान नहीं कर पाते थे तो उन्हें पानी आपूर्ति लिस्ट से बाहर कर दिया जाता था. साथ ही उन्हें जल बोर्ड कार्यालय से पानी भरने की अनुमति भी नहीं होती थी. बताया जा रहा है कि सिंह ने लिस्ट में बने रहने के लिए 50 लाख का भुगतान किया था लेकिन उन से और पैसे की डिमांड की गई थी.

सिंह ने बेटे ने बताया कि सुसाइड से दो दिन पहले ही उन्होंने 60000 रुपये जरवाल को दिए थे. जिस पर विधायक ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनका कोई भी टैंकर डी-लिस्ट नहीं होगा लेकिन इसके बाद भी जारवाल ने उन्हें हटा दिया. इतना ही नहीं जारवाल ने उनका भुगतान रोकने के आदेश भी दिये.