15 दस्तावेज पेश करके भी नहीं साबित कर पाई नागरिकता, कहा- कानूनी ल’ड़ाई में सब कुछ खो बैठी

नई दिल्लीः अगर आपके पास चार साल की मतदाता सूची, माता-पिता का एनआरसी क्लियरेंस, भूमि राजस्व भुगतान रसीदें, गांव के प्रधान द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र और शादी प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक जैसे साबुत होने के बाबजूद भी आपके भारतीय होने की गा’रंटी नहीं है। क्योकि असम से एक ऐसा मामला सामने आया जिसके बारे में सुनकर हर कोई दं’ग है।

देश में एनआरसी (NRC) की चर्चा हो रही है। और इसी एनआरसी को मिसाल बताकर असम में लोग एनआरसी का पूरे देश भर में जोरदार विरोध कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हुआ असम की जाबीदा के साथ जिसने अपनी और अपने पति की नागरिकता साबित करने लिए 15 तरह के दस्तावेज पेश किए,लेकिन वो फॉरेनर्स ट्रि’ब्यूनल में हार गईं और नागरिकता साबित नहीं कर पाई।

जाबीदा बेगम के इन तमाम दस्तावेजों सहित 15 दस्तावेजों को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता का प्रमाण मानने के इनकार कर दिया। वही हाई कोर्ट ने जाबीदा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि बैंक खातों का विवरण, पैन कार्ड और भूमि राजस्व रसीद जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।

जबकि असम प्रशासन द्वारा स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में भूमि और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों को रखा गया है। वही एनडीटीवी रिपोर्ट की मानें तो असम में रहने वाली एक 50 वर्षीय जाबीदा जो बड़ी मुश्किल से अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है, वह खुद को भारतीय नागिरक साबित करने की लड़ाई अकेले लड़ रही है।

ट्रिब्यूनल द्वारा वि’देशी घोषित की गईं जाबेदा बेगम हाईकोर्ट में अपनी लड़ाई हार चुकी है, और सुप्रीम कोर्ट उनकी पहुंचे से दूर दिख रहा है। जबेदा गुवाहाटी से लगभग 100 किलोमीटर दूर बक्सा जिले में रहती है।

जाबेदा बेगम ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, वो अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य हैं। वही पति बहुत समये से बीमार है। तीन बेटियां थीं, जिनमें से एक की हा’दसे में मौ’त हो गई। और एक बेटी लापता हो गई है, जिसकी जानकारी आज तक नाही मिल पाई है। सबसे छोटी अस्मिना पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। जिसके भ’विष्य को लेकर बहुत परेशान हूँ।

आपको बता दें जाबेदा बेगम की कमाई का लगभग पूरा हिस्सा कानूनी ल’ड़ाई में खर्च हो गया है, ऐसे में उसकी बेटी को कई बार भूखे ही सोना पड़ रहा है। उन्होंने कहा की मुझे चिं’ता है कि मेरे बाद मेरी बेटी का क्या होगा? मैं खुद के लिए उम्मीद खो चुकी हूं।

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