बिहार चुनाव: धर्म-जाति का चक्कर छोड़िए, बेरोजगारी के सवाल पर बहस कीजिए- रवीश कुमार की FB पोस्ट हुई वायरल

बिहार में विधानसभा चुनाव चल रहे है और इस बार बेरोजगारी का मुद्दा सबसे अहम माना जा रहा है. एक तरफ तेजस्वी यादव ने 10 लाख सरकारी नौकरियों का ऐलान किया है तो वहीं बीजेपी ने भी 19 लाख रोजगारों का वादा कर दिया है. ऐसे में विकास और बेरोजगारी इस बार सबसे अहम मुद्दे माने जा रहे है. इसी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एक वीडियो शेयर करके लोगों से अपील की हैं कि धर्म जाति को छोड़कर एकजुट हो बेरोजगारी पर सवाल करें.

रवीश कुमार ने अपने वीडियो में कहा कि नौकरी सीरिज ने रेलवे पर दबाव बनाया और पीयूष गोयल को भर्तियों का भरोसा दिलाना पड़ा. कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने परीक्षा पास कर ली है लेकिन उन्हें अब तक ट्रेनिंग मिलना शुरू नहीं हुआ है. वोट आप किसी को भी दीजिए लेकिन इस मुद्दे के साथ अन्याय न करिए.

नोटबंदी के बाद से ही अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है.

ravish kumar

रवीश कुमार ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि रोजगार तीन तरह के होते है, स्वरोजगार, सरकारी और प्राइवेट नौकरी है. उन्होंने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा लोग स्वरोजगार करते हैं. असंगठित क्षेत्र के 65 फीसदी लोग स्वरोजगार में लगे है लेकिन इसमें काई बहुत कम है.

पत्रकार ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन ऐसे सेक्टर हैं जहां बिना कौशल के भी काम मिल सकता था लेकिन 2014 के बाद से निर्यात गिरता जा रहा है और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कम हो गया. कंस्ट्रक्शन में भी बैठ गया. अब न तो यहां सैलरी है और न ही नौकरी है, टेक्सटाइल भी बैठ गया है.

बक्सर, आरा, नालंदा. जमुई, दरभंगा के कॉलेज से पढ़े रहे नौजवानों को क्वालिटी नहीं मिली रही है. अब आपको 10 से 15 हजार का वेतन मिल रहा है, अगर आप कई साल 15 हजार के वेतन पर काम करते है तो काम करते हुए भी आप गरीब होंगे.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से ही अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है, अब भारत के पास डेमोग्रैफिक डिविडेंट ख’त्म होने लगा है. यानी कमाई में बढ़ोतरी औऱ थोड़ी बचत. अब लोग बेरोजगारी के दौर से बुढ़ापे में प्रवेश करेगी. लोगों के पास सामाजिक सुरक्षा कम है. आपको अच्छी सैलरी का काम नहीं मिल रहा है.

आप जो काम करेंगे उसे भी बहुत अच्छा नहीं कर पाते है, सरकार ने स्किल इंडिया चलाया और लेकिन एजुकेशन इंडिया नहीं चलाया. देश के यूथ के साथ मजाक चल रहा है. उन्होंने कहा कि लोगों को कुछ तो मिला है लेकिन उसके बदले में सब कुछ ले लिया गया है. हर जगह के युवा सरकारी नौकरियों को लेकर परेशान हैं.

पिछले जून में जो रिजल्ट आए उनपर अब तक भर्ती क्यों नहीं हुई? इस दौरान रवीश ने भोजपुरी में कहा कि हम जानतानी केतना लोग जाति-पाति के पीछे पड़ल हैं. नौकरी के सवाल के ठीक करेहे के पड़ी. उन्होंने कहा कि मैं अकेला ऐसा पत्रकार हूं दुनिया में जिसने नौकरी पर सैकड़ों कार्यक्रम किये है, उम्मीद करते है कि नौकरी के मुद्दे को व्यापकता से देखा जाए, अगर ऐसा नहीं होता तो अच्छा जीवन नहीं जी पाएंगे.

साभार- जनसत्ता