दिवाली: ठीक 37 साल बाद बना महासंयोग, लक्ष्मी ऐसे होंगी प्रसन्न, धनवर्षा के लिए सबसे उत्तम पूजा मुहूर्त

दिवाली 2019 इस साल की सबसे खास दिवाली का दिन है. दोस्तों लगभग 37 साल के बाद इस तरह का महासंयोग बना है, जब सूर्य देव का दिन चित्रा नक्षत्र अमावस्या को महालक्ष्मी जी अपने भक्तों पर धनवर्षा करेंगी. इसके साथ ही काली माता की आराधना भी बहुत शुभ फलदायक है, इस महीने यानी कि कार्तिक मास में चतुर्दशी 27 नवंबर के दिन देश समेत दुनिया भर में दिवाली धूमधाम से मनाई जाएगी.

ज्योतिषाचार्य पंडित ब्रह्मदत्त के अनुसार, कार्तिक माह की अंधेरी रात को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार दिवाली की कोई भी पूजा बिना दीए जलाए पूरी नहीं मानी जाती है. ज्योतिष आचार्य के अनुसार अनुसार सारे घर की अच्छी तरह से सफाई करना चाहिए, और विशेषकर मुख्य द्वार को बहुत अच्छी तरह से साफ करें.

Especially before the pooja, keep this in mind

खासतौर से पूजा के ठीक पहले इस बात का बिल्कुल ध्यान रखें के घर के सभी द्वार साफ़ रहें, और मुख्य द्वार पर हल्दी का जल छिड़कना शुभ माना जाता है. इसके अलावा गणेश जी को दूब-घास तथा लक्ष्मी जी को कमल के पुष्प चढ़ाने का प्रावधान है, क्योंकि यह दोनों चीजें हमारे हिंदू धर्म के देवी देवताओं को बहुत ज्यादा पसंद आती हैं.

इसके अलावा अगर आप बना सकते हैं तो अपने घर के बाहर रंगोली जरूर बनाएं, और एक बात का खास ध्यान रखें कि मुख्य द्वार पर जूते और चप्पल बिल्कुल ना हों. रसोई में भी झूठे बर्तन बिल्कुल न रहने दें. अपनी रसोई में भी अवश्य करके दीपक जलाएं, क्योंकि आज के दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा करने का भी विधान है.

इसलिए इस बात का जरूर ध्यान रखें कि अपने किचन में एक दीपक जरूर रोशन करें आचार्य के अनुसार पूजा के लिए उत्तम समय नीचे दिया गया है. अपने सभी साथियों और परिजनों को इसको शेयर कर दें, क्योंकि ये सबसे उत्तम मूहूर्त है.

Mahasayoga formed after exactly 37 years, Lakshmi will be happy like this

दोष काल: शाम 05:28 बजे से 08:10 बजे तक
पूजा के लिए उत्तम समय (वृश्चिक लग्न): 07:30 बजे से 07:35 बजे
उत्तम लाभ के लिए चौघड़िया पूजा समय : 08:36 बजे से
निशीथ काल
जो समय ऊपर  है,
इस समय में कर सकते हैं – 08:10 बजे
से 10:52 बजे तक
सुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 1:30 बजे तक लाभ अमृत का मुहूर्त

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