MIM की जीत मुसलमानों को सियासत से बेदखल करने वालों के ताबूत में एक कील है: डॉ ज़फरुल इस्लाम

बिहार चुनाव में एमआईएम की जीत पर असदुद्दीन ओवैसी बोले, हम बंगाल में हर जगह से चुनाव लड़ेंगे

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और उसके नेता असदुद्दीन ओवैसी पर चुनावों में अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार कर भाजपा और उनके सहयोगी दलों की मदद करने का आरोप लग रहे है, बिहार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) ने 5 सीटें जीती है. वही एआईएमआईएम की जीत को लेकर कांग्रेस सहित तमाम सियासी दलों ने असदुद्दीन ओवैसी पर हम’ला बोला है।

वही विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम की जीत पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि AIMIM ने बिहार में चुनाव लड़कर बीजेपी और उनके सहयोगी दलों की मदद की है. जिसकी वजह से महागठबंधन को काफी नुकसान पहुंचा है।

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहाद-उल-मुस्लिमीन के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ ज़फरुल इस्लाम ने कहा है कि बिहार चुनाव में एआईएमआईएम की शानदार जीत से भारत के मुसलमानों को राजनीति से अलग थलग करने और हा’शिए पर पहुंचाने की कोशिश करने वालों के ताबूत में एक कील साबित हुआ है।

वही असदुद्दीन ओवैसी को “वोट कटवा” कहने के आरोपों पर सवाल उठाते हुए ज़फरुल इस्लाम ने कांग्रेस पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, ऐसी टिप्पणियों करना आसान है. क्या मुस्लिम मतदाताओं पर उनका एकाधिकार है? ज़फरुल इस्लाम ने कहा की धर्मनि’रपे’क्ष और वामपं’थी दलों ने मुस्लिम राजनीतिक आवाज़ों को हाशिए पर डाल दिया है।

अगर कोई पार्टी या संसद खुलकर हमारे लिए आवाज़ उठाता है तो उसे वोट कटवा और बीजेपी की बी टीम कहा जाता है. ऐसी पार्टियों ने हमारे लिए क्या किया? अगर मुसलमानों को मुख्यधा’रा की राजनीति से दूर रखा गया है तो यह भाजपा की रणनीति है।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ ज़फरुल इस्लाम ने कहा है कि एआईएमआईएम की जीत को मुसलमानों को हाशिए पर लाने के प्रयास के खात्में के रूप में मानते हैं. उन्होंने कहा की कुछ आवाजें ऐसी होनी चाहिए जो हर राज्य विधानसभाओं और संसद में हिंदुस्तान के मुस्लिम मुद्दों को उठा सकें।

उन्होंने कहा, की अगर ओवैसी की पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में लड़ा है तो यह उनका संवैधानिक अधिकार है और धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए एक उचित जवाब भी है कि अगर आप हमारे मुद्दों को नहीं उठाते हैं तो हमारे सांसद राज्य विधानसभाओं में मुसलमानों के लिए आवाज़ उठाएंगे।