हाथरस मामला: रे#प से दुनिया भर में बदनाम हुआ भारत, UN की ओर से जारी हुआ बयान

हाथरस मामला: रे#प से दुनिया भर में बदनाम हुआ भारत, UN की ओर से जारी हुआ बयान

देश भर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हो रहे यौ#न अपराधों के मामलों ने दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींच लिया हैं. इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक रेनाटा डेसालिएन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हाथरस और बलरामपुर में हुई कथित सामूहिक दु’ष्क’र्म और ह#त्या की घटनाएं बताती हैं कि समाज में वंचित वर्ग के लोगों को लिंग आधारित हिं#सा/अ’परा’ध का ख’त’रा ज्यादा हैं.

वहीं यूपी में हुए मामलों पर भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक की सामने आई गैरजरूरी टिप्पणी पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा है कि इन मामलों को लेकर किसी भी बाहरी एजेंसी की बेतुकी टिप्पणी को नजरअंदाज करना उचित रहेगा क्योंकि फ़िलहाल इन मामलों में जांच चल रही है.

इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इन मामलों को बेहद ही गंभीरता से ले रही है. रेनाटा डेसालिएन ने अपने बयान में कहा कि यह जरुरी है कि सूबे का पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि इस मामले के दोषियों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके, परिवार को वक्त पर न्याय पाने के लिए सशक्त बनाए जाने की जरूरत है.

इसके आलावा पी’ड़ि’त परिवार को सामाजिक समर्थन, काउंसिलिंग, स्वास्थ्य सुविधा और पुनर्वास जैसी सुविधा भी मिलना चाहिए. बयान में कहा गया है कि देश भर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले यौ’न हिं#सा के मामले तेजी से बढ़ रहे है जिन्हें लेकर संयुक्त राष्ट्र दुखी और चिं’तित है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र पदाधिकारी की टिप्पणी को लेकर पूछे गए सवाल पर मीडिया को जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं के वि’रु’द्ध होने वाली यौ#न हिं#सा की हालिया कुछ घ’टनाओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक द्वारा की गई कुछ टि’प्पणि’यां पूरी तरह गै’रजरू’री है.

उन्होंने आगे कहा कि भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक को यह जानकारी होना चाहिए कि इन मामलों को लेकर सरकार बे’हद गंभी’र है और इन पर कार्रवाई चल रही है.

श्रीवास्तव ने कहा कि फ़िलहाल मामला जांच प्रक्रिया के अधीन है, ऐसे में बाहरी एजेंसी की किसी भी गैरजरूरी टिप्पणी को नजरअंदाज करना ही ठीक है. यह रेखांकित करते हुए कि संविधान सभी भारतीय नागरिकों को समानता का अधिकार देता है.

श्रीवास्तव आगे कहा कि ने कहा कि लोकतंत्र होने के नाते हमारे पास समाज के सभी वर्गों को न्याय देने के ऐसे रि’कॉर्ड मौजूद है जो वक्त की कसौ’टी पर खरे साबित हुए हैं.

साभार- जनसत्ता