आरबीआई के पूर्व गवर्नर ‘रघुराम राजन’ का लॉक डाउन पर बड़ा बयान, हम लंबे समय तक गरीबों की मदद नहीं कर पाएंगे और…

इस वैश्विक महामारी में दुनियाभर समेत, हमारे देश की भी अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता हो गई है. पिछले काफी लंबे समय से बंद पड़े उद्योग धंधों की वजह से कामगारों का जीवन संक’ट में आ गया है. सबसे ज्यादा इस चीज़ से देश का मजदूर वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवार प्रभावित हुए हैं. हालाँकी मजदूर वर्ग को सरकार के अलावा स्थानीय सामाजिक संगठन और आसपास के लोग मदद पहुंचा ही रहे हैं, लेकिन यह नाकाफी है.

मध्यम वर्ग के लोगों के साथ दिक्कत ये है कि, वह परेशानी में किसी मजदूर वर्ग की तरह मदद नहीं ले सकता. हालांके निचले तबके के लोग किसी से मदद मांगने में कोई संकोच भले ही न करें, लेकिन एक मध्यमवर्गीय परिवार अपने मान सम्मान की खातिर चाहे जिसके आगे हाथ नहीं फैला सकता. कुछ जगह ये देखने में भी आया, जब लोगों ने राशन-पानी देने के वीडियो और फोटो वायरल होते देखे तो उन्होंने भी शर्मिंदगी की वजह से सार्वजानिक रूप से मदद लेने में झिझक महसूस की.

तुरंत खोल देनी चाहिए अर्थव्यवस्था, हम लंबे समय तक गरीबों की मदद नहीं कर पाएंगे और न ही नौकरियां बचेंगी- रघुराम राजन

Raghuram Rajan Ex Governor of RBI

हमारे देश में अधिकतर ऐसे लोगों की संख्या है, जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं. इसके बाद कुछ उच्च मध्यमवर्गीय परिवार से लोग आते हैं, लेकिन इनके पास भी इतनी जमा पूंजी नहीं होती कि यह लोग महीनों तक अपने घर को बिना कोई काम किए चला सकें.

कोरोना की वजह से दुनियाभर मैं इस तरह की लोगों को दिक्कत झेलना पड़ रही है, हो सकता है कि आने वाली 3 मई को कुछ जगह पर लॉक डाउन खुल जाये, शायद यहां सशर्त लॉक डाउन खोल दिया जाए, लेकिन कुछ इलाके अब भी ऐसे हैं जो रेड ज़ोन में हैं, और उम्मीद है कि इस जगह लॉक डाउन और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है.

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दी सरकार को सलाह

ऐसे में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का बयान आया है, अगर नौकरियां बचानी है तो हमें लॉक डाउन को खोल देना चाहिए. अगर समय रहते ऐसा नहीं किया गया तो इसकी वजह से लाखों मजदूर और देश में करोड़ों लोगों के सामने अपनी आजीविका चलाने का एक बड़ा संक’ट पैदा हो जाएगा.

ऐसे हालातों में लोगों की नौकरियां बचना मुश्किल है, क्योंकि पहले से ही अर्थव्यवस्था डामाडोल चल रही थी और पिछले काफी दिनों से सब कुछ बंद होने के कारण, अधिकतर कारोबार चौपट होने के कगार पर पहुंच जाएंगे, क्योंकि उनको शुरू करने के लिए जो लगता चाहिए, वो इस बंद के दौरान खर्च हो चुके होगी.

किसी भी कारोबार में रोटेशन चलने के लिए पूंजी की ज़रुरत पड़ती है, कई फैक्टरी मालिक पहले से ही गिन-गिन कर सांस ले रहे थे, अब बची खुची कसर लॉक डाउन में पूरी हो जाएगी.

अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना होगा मास्टर प्लान

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सरकार को सलाह दी है कि, सावधानी के साथ में वह सतर्कता बरतते हुए लॉक डाउन खोलने के बारे में सोचें. जिससे लोगों के कारोबार और उनका जीवन सुचारु रुप से चल सके.

आपको बता दें कि हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, राहुल गांधी ने भी देश के गरीबों की मदद के लिए सरकार को सलाह दी है, कि मजदूरों को रहत देने के लिए तकरीबन 65 हज़ार करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी.

इस वक्त देश के मजदूरों को मदद की सख्त ज़रुरत है, तभी इनके लिए कुछ राहत का काम किया जा सकेगा. इसके अलावा देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी कहा था कि पॉलिसी मेकर्स को इस आर्थिक मंदी से निकलने के लिए कोई मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए, क्योंकि अगर इसी तरह से यह लॉक डाउन लंबे समय तक जारी रहा तो अर्थव्यवस्था को भारी कीमत चुकानी होगी और तब तक सब कुछ तबा’ह हो चुका होगा.

Leave a Comment