लॉकडाउन ने बदली जिंदगी- परिवार का पेट पालने के लिए इंग्लिश टीचर लगा रहे सब्जी का ठेला

दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही महामारी कोविड-19 हाहाकार मचा रखा हैं. कोरोना वायरस का प्रकोप भारत में भी तेजी से बढ़ता जा रहा है, केंद्र सरकार ने कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लॉकडाउन लागू किया था लेकिन इसके बाद भी इस बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका. लेकिन इस लॉकडाउन के चलते ज्यादातर भारतियों की आर्थिक स्थिति जरुर बिगड़ गई. लॉकडाउन देखते ही देखते लाखों लोगों की नौकरियां खा गया.

कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने कर्मचरियों को नौकरी से निकल कर बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वहीं कई ने तो अपने कर्मचारियों का वेतन तक नहीं दिया. इसके आलावा कई कंपनियां और संस्थान अभी भी बंद है जिससे लोगों के सामने दो वक्त के खाने और रोजमर्रा की चीजों की समस्या खड़ी हो गयी हैं.

आलम यह है कि अब उनके पास पेट भरने के पैसे भी नहीं बचे है इसलिए कोई सब्जी बेचने तो कोई मजदूरी करने पर मजबूर हो गए हैं. ऐसी ही एक मार्मिक कहानी नई दिल्ली से सामने आई है. जहां पर एक स्कूल में बतौर इंग्लिश टीचर पढ़ाने वाले एक शख्स को अपना परिवार पालने के लिए सब्जी का ठेला लगाना पड़ रहा हैं.

मुश्किलों के मा’रे इस टीचर का नाम हैं वजीर सिंह, वो दिल्ली के सर्वोदय बाल विद्यालय में अंग्रेजी के टीचर हैं. पिछले तीन महीनों से उन्हें सैलरी नहीं मिली सकी हैं और अब उनके पास इतने भी पैसे नहीं बचे है कि वह एक और माह घर बैठे खर्चा चला सकें. ऐसे में उन्हें मजबूर होकर सब्जी का ठेला लगाना पड़ रहा हैं.

कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने आम आदमी को ऐसे दिन दिखा दिए हैं जहां एक शिक्षक को अपने परिवार का पेट पालने के लिए गलियों में घूम-घूमकर सब्जी तक बेचना पड़ रहा हैं.

टीचर वजीर ने कहा कि मैंने कभी जिंदगी में नहीं सोचा था कि मुझे ऐसे दिन भी देखने पड़ेगे कि अपने परिवार का पेट पालने के लिए ठेले पर सब्जी बेच कर परिवार का गुजारा करना होगा.

जब वजीर सिंह सब्जी का ठेला लेकर गलियों में निकलते हैं तो उन्हें जानने वाले और उनके विद्यार्थी भी यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि कैसे एक शिक्षक सब्जी बेचने के लिए मजबूर हो चूका हैं. लेकिन वो कहते है कि मुझे थोड़ा तो अजीब लगता है लेकिन क्या करें जिंदा रहने के लिए सब करना पड़ता हैं.

साभार- जागरण