ज़ी न्यूज़ के मालिक के चीन प्रेम का हुआ भंडाफोड़, ज़ी न्यूज़ के मालिक ने अपना मुम्बई वाला बंगला चीन के वाणिज्यिक…

जी न्यूज़ एक तरफ खुद को एक राष्ट्रवादी न्यूज़ चैनल के रूप में प्रस्तुत करता है और पाकिस्तान, चीन का विरोध करने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत करता है. वहीं दूसरी तरफ जी न्यूज़ के मालिक अपना बंगला चीन को किराए पर देते है. ऐसे में सोशल मीडिया पर जी न्यूज़ के इरादों पर सवालियां निशान लगाए जा रहे है. दरअसल ज़ी न्यूज़ के मालिक सुभाष चंद्रा ने अपना मुम्बई स्थित बंगला चीन के वाणिज्यिक दूतावास को किराए पर दे रखा है.

इसे लेकर सोशल मीडिया पर जी न्यूज़ की काफी खिल्ली उड़ाई जा रही हैं. बताया जा रहा है कि इसी साल एक जुलाई को सुभाष चंद्रा और चीन के कांसुलेट जनरल हुआंग जिआंग के बीच किराए को लेकर करार हुआ था. इस संबंध में मुंबई के रजिस्ट्री ऑफिस में समझौते पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किये हैं.

लेकिन इसके बाद भी चैनल फर्जी राष्ट्रवाद फैलाता है और चीन को आंखें दिखाता नजर आता है. वहीं दूसरी तरफ पैसों के लालच में चीनी लोगों को अपना बंगला किराए पर देता हैं. असल में यह सब कुछ एक तरफ से जनता को मुर्ख बनाना हुआ, इन्हें राष्ट्र से कोई मतलब नहीं इन्हें सिर्फ पैसे की फ़िक्र है.

प्रोपर्टी के मामले में खबर देने वाली वेबसाइट स्क्वाॅयर फीट इंडिया डाॅट काॅम की खबर के मुताबिक इस बंगले को दो साल के लिए चीन को किराए पर दिया गया है. यह डील एक जुलाई 2020 से लेकर 30 जून 2021 तक प्रभावी रहेगी.

वेबसाइट के अनुसार उन्होंने इस मामले को लेकर सुभाष चंद्रा व चीनी कंसुलेट जनरल दोनों से बयान लेने के लिए संपर्क साधने का प्रयास किया लेकिन दोनों पक्ष से कोई जवाब नहीं मिला.

बता दें कि सुभाष चंद्रा का यह बंगला जाॅली मेकर 1 में मौजूद है जो मुंबई की एक बेहद महत्वपूर्ण जगह हैं. एक जुलाई 2020 की तारीख को मुंबई के रजिस्ट्री कार्यालय में यह सौदा रजिस्टर हुआ. सुभाष चंद्रा ने कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भाऊ पाटिल एरोट नाम के शख्स को पाॅवर ऑफ अटर्नी ट्रांसफर की हैं.

खबरों की मानें तो इस बंगले के किराए के रूप में सुभाष चंद्रा को 4.90 लाख रुपये प्रति महीना मिलेगा. इस बंगले का काॅरपेट एरिया 2590 वर्ग फीट है और इसके दोनों साइड पार्किंग की सुविधा के साथ यह एक भव्य आवास स्थल मौजूद है. वहीं इस करार के लिए लाॅक इन पीरियड नौ महीने तय किया गया है और इसे रद्द करने के लिए दोनों पक्षों के बीच तीन महीने का नोटिस पीरियड भी तय हुआ हैं.