किसान आंदोलन में किसानों ने मंगवाए घोड़े जानिए क्या होगी घोड़ों की भूमिका

केंद्र सरकार किसान आंदोलन को रोकने के लिए कड़े से कड़े इंतजाम कर रही है। वहां किसान भी आगे बढ़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अब किसानों ने मंगवाए घोड़े

किसान आंदोलन को चलते हुए अब हफ्ते भर से ज्यादा समय बीत चुका है किसानों और सरकार के बीच चल रही बातचीत से भी कोई नतीजा निकलता हुआ नहीं दिख रहा है. क्योंकि सरकार लगातार किसानों को मनाने में लगी है कि यह तीनों कृषि कानून उनके हित में हैं परंतु किसान अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

उनका कहना है कि यह तीनों ही काले कानूनों से किसान दोयम दर्जे के बनकर रह जाएंगे. किसानों की सरकार से बस यही मांग है कि वे इन तीनों ही काले कानूनों को वापस ले लेकिन अब इस पर बात बनती हुई नहीं दिख रही है।

Peasant movement

वही गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत से भी समस्या का हल नहीं निकल पाया है ऐसे में किसान भी अब आगे की रणनीति तैयार करने में लग गए हैं. आपको बता दें कि हफ्ते भर से देश के किसान केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

वहीं पंजाब और हरियाणा के किसान सिंधु बॉर्डर के पास डटे हुए हैं, यह किसान अपने आंदोलन को दिल्ली तक ले जाना चाहते हैं किसानों का कहना है कि जब तक सरकार यह तीनों काले कानून वापस नहीं ले लेती वह यहां से हटने वाले नहीं हैं.

अब किसानों ने मंगवाए घोड़े:-

जहां सरकार किसानों को रोकने के लिए कड़े से कड़े इंतजाम कर रही है वहां किसान भी आगे बढ़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग तो क्या सड़क तक खोद डाली है. लेकिन ऐसा लगता है कि किसान सरकार द्वारा खड़ी की गई हर दीवार को लांघने की तैयारी में है।

ऐसा ही एक दृश्य किसान आंदोलन के बीच सामने आया जब किसान आंदोलन के बीच 40 से 50 घोड़े देखे गए. जब किसानों से इन घोड़ों के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस ने हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगा रखे हैं।

ऐसे में अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती है और हमें आगे बढ़ना हुआ तो हम घोड़ों से बैरिकेडिंग को लांघ जाएंगे। वही किसानों का यह भी कहना है कि अगर और घोड़ों की जरूरत पड़ती है तो उनका भी इंतजाम किया जाएगा।

आपको बता दें एक पिता के लिए बेटी की शादी बहुत अहम होती है. वही किसान आंदोलन में ऐसे भी किसान हैं जो अपने अधिकारों की लड़ाई के बीच अपनी बेटी की शादी भी छोड़ रहे हैं.

किसान आंदोलन में शामिल किसान सुभाष चीमा ने बताया कि उनकी बेटी की शादी है। लेकिन उससे पहले अपने हक की लड़ाई लड़ना है क्योंकि वह आज जो कुछ भी है सिर्फ अपनी खेती की वजह से हैं ऐसे में वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे।