किसानों का आंदोलन हुआ तेज, 50 हज़ार किसान बढ़ें कुंडली बॉर्डर की तरफ सरकार की बढ़ी मुश्किलें

किसान आंदोलन तेज होता जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर का रुख कर रहे हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार और किसान दोनों को पीछे हटना होगा, सरकार कानून वापस ले और किसान खुद वापस चले जाएंगे।

केंद्र सरकार द्वारा लाये गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी विरोध प्रद्रशन में शामिल होने के लिए पंजाब (Punjab) के अलग-अलग इलाकों से करीब 50 हजार किसान दिल्ली की ओर रवाना हो रहे हैं। किसानों का जत्था लगभग 1200 ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर अमृतसर से दिल्ली की और बढ़ रहा है। अब ये आंदोलन धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है आंदोलन को चलते हुए 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं और अब किसान आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।

आपको बता दें कि पिछले 16 दिनों से पंजाब हरियाणा के किसान सिंधु बॉर्डर के पास डटे हुए हैं सिंधु बॉर्डर के पास किसानों और पुलिस के बीच कई झड़प भी हुई थी जिसमें पुलिस ने आं’सू गै’स के गो’ले दागे थे तथा साथ ही ला’ठीचा’र्ज जैसी तस्वीरें भी सामने आई थीं। किसानों को रोकने के लिए सरकार का रवैया काफी सख्त रहा था।

50 हज़ार किसान कुंडली बॉर्डर की तरफ आगे बढ़ें

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बता दें कि पंजाब और हरियाणा के किसानों को रोकने के लिए दिल्ली की सभी सीमाएं सील कर दी गई थी लेकिन अब किसान अपनी मांगों को पूरा होते हुए ना देख कर फिर से आगे बढ़ने के मूड में हैं। देशभर के किसान अब दिल्ली बॉर्डर का रुख करते हुए नजर आ रहे हैं।

वहीं किसान नेता से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार और किसान दोनों को ही पीछे हटना होगा सरकार कानून वापस ले ले किसान अपने आप ही पीछे हट जाएगा। आपको बता दें पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का दूसरा जत्था भी अब पंजाब के अमृतसर से कुंडली बॉर्डर के लिए आगे बढ़ गया है।

किसानों ने कुंडली बॉर्डर की ओर कूच करने से पहले अमृतसर के गोल्डन टेंपल में पूजा की ऐसे में अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। क्योंकि जब किसान सिंधु बॉर्डर पर आगे बढ़ रहे थे तो किसान और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी।

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि आज 2 बजे किसान संगठन फिर से मीटिंग करने वाले हैं जिसमें आगे की रणनीति पर फैसले लिए जाएंगे. लेकिन उनका यह भी कहना है कि सरकार और किसान दोनों को ही पीछे हटना होगा।