रिटायर्ड सैन्यकर्मी का बेटा है निकला पाकिस्तानी आतंकी संगठन ISI का जासूस, ऐसे हुआ खुलासा

मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान पुलिस ने सोमवार को आर्मी इंस्टॉलेशन्स से जुड़ी खुफिया जानकारी ISI से साझा करते हुए तीन सिविल डिफेंस के कर्मचारियों को रंगे हाथों दबोचा. इस कार्रवाई को भारत में बने पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क को तोड़ने में एक अहम कदम माना जा रहा हैं. खबरों के अनुसार पकड़े गए दो लोगों में से एक को सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की महिला ISI ऑपरेटिव ने हनी ट्रैप में फंसाया था.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राजस्थान पुलिस ने लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर सेना की गोला बारूद डिपो में तैनात सिविल डिफेंस कर्मचारी विकास कुमार और आर्मी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सिविल कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी चिमन लाल को जासूसी के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया हैं.

लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस को विकास कुमार के बारे में अगस्त 2019 में पता चला था. विकास पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स को ख़ुफ़िया सैन्य जानकारी दे रहा था. जानकारी के अनुसार विकास को फेसबुक के जरिए मुल्तान स्थित महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने अपने जाल में फंसाया था.

इस महिला ने अनुष्का चोपड़ा नाम से एक फर्जी फेसबुक अकाउंट के जरिए विकास से संपर्क साधा था और उसे फंसाया था. विकास  ORBAT गोला-बारूद (फोटो, मात्रा, प्रकार, कब आया, कब गया) और कौन सी यूनिट फायरिंग प्रैक्टिस के लिए आ रही है जैसी संवेदनशील जनकारी साझा कर रहा था.

इसके एवेज में पाया गया कि विकास कुमार के खुद के तीन और उसके भाई के एक बैंक खाते में इसके लिए लगातार भुगतान किया जा रहा था. विकास झुंझुनू जिले के एक गांव का मूलनिवासी है और उसके पिता एक रिटायर्ड सैन्यकर्मी हैं. वही उसके साथ पकडे गए चिमन लाल बीकानेर जिले के अजीतमना गांव का रहने वाला हैं.

सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान विकास ने बताया कि पिछले साल मार्च या अप्रैल के दौरान अनुष्का चोपड़ा नाम की आईडी से उसे फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वेस्ट प्राप्त हुई थी जिसे उसने एक्सेप्ट कर दिया था. इसके बाद वो दोनों अच्छे दोस्त बन गए और इस दौरान वॉट्सएप नंबर का भी लेन-देन हुआ और वहां चैटिंग और कॉलिंग शुरू हो गई.

ISI के जासूसी प्लान के तहत PIO विकास से बातचीत करने के लिए एक भारतीय वॉट्सएप नंबर का उपयोग कर रही थी और उसने खुद को मुंबई में कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट में काम करने वाली बताया था. सूत्रों ने अनुसार विकास उसके कहने पर कई वॉट्सएप ग्रुपों में शामिल हो गया.

जिनमें कई ग्रुपों ऐसे भी थे जिसमें वह और कई सेवारत डिफेंस और सिविल डिफेंस कर्मचारी भी थे. इसी दौरान उसने विकास को अपने बॉस अमित कुमार सिंह (हैंडलर का फर्जी नाम) से मिलाया. जिसने खुद को कई बार CSD का तो कई बार मिलिट्री इंजीनियर सर्विस का बताया.

जैसे ही विकास कुमार और पाकिस्तानी हैंडलर अमित कुमार सिंह के बीच बातचीत शुरू हुई और दोस्ती हुई. अनुष्का चोपड़ा ने अपना फेसबुक अकाउंट और वॉट्सएप नंबर बंद कर लिया. इसी दौरान सूत्रों के अनुसार हैंडलर ने विकास को पैसे के बदले सैन्य जानकारी शेयर करने के लिए तैयार कर लिया.

सूत्रों के अनुसार पूछताछ में विकास ने कबूल किया है कि उसे ख़ुफ़िया जानकारी देने के बदलने में हैंडलर्स से कम से कम 75,000 रुपए मिले हैं. जिसमें से उसने 9,000 रुपए चिमन लाल को दिए हैं. फ़िलहाल दोनों पुलिस हिरासत में है जल्द ही दोनों को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा.

साभार- टीवी9भारतबर्ष