VIDEO: प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑप इंडिया’ पर साम्प्रदायिकता फैलाने पर FIR दर्ज, मस्जिद में बलि की बात कही थी

खबरों को सांप्रदायिक मोड़ देने के लिए खासा बदनाम वेबसाइट ‘ऑप इंडिया’ ने गोपालगंज ज़िले के एक गांव में रोहित जायसवाल नाम के एक युवक की मौत पर 9 मई को एक ख़बर चलाई थी. दरअसल 9 से 13 मई के बीच ऑप इंडिया के एक कर्मचारी अनुपम कुमार सिंह ने इस विषय पर पांच खबरें लिखी हैं. लेकिन पुलिस को ऐतराज जिस खबर से है उसका शीर्षक है ‘मस्जिद को शक्तिशाली बनाने के लिए हिन्दू बच्चे की बलि दी गई थी।

साथ ही पुलिस की प्रताड़ना की वजह से उस लड़के के परिवार वालो को गांव छोड़कर भी भागना पड़ा. बच्चे का नाम रोहित जायसवाल था और उसकी उम्र 15 साल थी. ऑप इंडिया ने इस आर्टिकल में मृत बच्चे रोहित के पिता राजेश जयसवाल का हवाला देते हुए लिखा- गाँव में नया मस्जिद बन रही है और मुस्लि’मों के बीच ये चर्चा आम थी कि अगर किसी हिन्दू की ‘ब’लि’ दे दी जाए तो मस्जिद शक्तिशाली हो जाएगी।

फिर क्या बच्चों के बहाने उनके नाबालि’ग बेटे को बुलाया गया. मस्जिद में उन बच्चों के गार्जियन पहले से इन्तजार कर रहे थे, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया था हलाकि इस आर्टिकल में पी’ड़ित के पिता, बहन के वीडियो के अलावा पुलिस का भी वीडियो शामिल किया गया है।

शुरूआती 2 वीडियो पुलिस थाने के हैं. इसमें पुलिस को पी’ड़ित परिवार के साथ बदसलूकी से पेश आते हुए देखा जा सकता है. बाकी के 2 वीडियोज़ में पी’ड़ित का परिवार लोगों से मामले का संज्ञान लेने के लिए गुहार लगा रहा है।

यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि वीडियो में परिवार ने मौत के लिए कुछ लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया लेकिन कहीं भी मस्जिद या मुसलमान का एक बार भी ज़िक्र नहीं किया गया. उन्होंने कहीं भी ये नहीं कहा है कि ये हत्या’ मस्जिद में हुई या मस्जिद को शक्तिशाली बनाने के लिए बलि दी गयी है।

ऑप इंडिया ने इस मामले पर अपडेट देते हुए 2 आर्टिकल लिखे, सभी के टाइटल में एक चीज़ कॉमन है – गोपालगंज मस्जिद ‘ब’लि’ मामला’, 9 मई को छपे आर्टिकल का टाइटल: मस्जिद को शक्तिशाली बनाने के लिए बच्चे की दी ब’लि, पुलिस प्रताड़ना के बाद हिन्दू परिवार को छोड़ना पड़ा गाँव

11 मई को छपे आर्टिकल का टाइटल गोपालगंज मस्जिद ब’लि’ मामला: 4 आरोपितों को पकड़ चुकी है पुलिस, परिवार के आरोपों पर साधी चुप्पी 11 मई को ही छपे एक और आर्टिकल का टाइटल किसी से कोई दुश्मनी नहीं, बस बेटे के लिए न्याय चाहिए – गोपालगंज मस्जिद ब’लि’ मामले में पिता ने लगाई गुहार

 

इसके अलावा ये फेक न्यूज़, ABP बिहार, विजय कर्नाटका नाम की कुछ वेबसाइट्स ने भी ऐसी ही ख़बर प्रकाशित की है. (ABP बिहार ABP न्यूज़ का हिस्सा नहीं है)

ऑप इंडिया ने 13 मई को इस मामले पर दो और आर्टिकल छापे. जिसके हेडिंग में मस्जिद या ब’लि का ज़िक्र नहीं है लेकिन आर्टिकल में ये अपनी बात पर कायम हैं. और पी’ड़ित के परिवार हवाला देकर यही दावा किया गया है कि रोहित को मस्जिद में ब’लि दी गई. इन सभी ख़बरों से कुछ सवाल सामने आते हैं।

ऑल्ट न्यूज़ की खबर के अनुसार, इन सारे सवालों पर हम बारी-बारी से ध्यान देंगे. लेकिन सबसे पहले देखते हैं कि इस घट’ना की शुरूआत की रिपोर्टिंग क्या कहती है. ऑप इंडिया के ही अनुसार ये घटना 28 मार्च की है. हमने कीवर्ड सर्च से पाया कि दैनिक भास्कर ने इस मामले पर 30 मार्च को एक ख़बर प्रकाशित की थी. रिपोर्ट में लिखा है – “रोहित अपने चार साथियों के साथ गोइता टोला खनुआ नदी घाट पर नहाने गया था. देर शाम तक वह घर नहीं लौटा तो परिजन खोजने के लिए निकले।

इस दौरान विजय मल भगत का पुत्र ने बताया की रोहित पानी में डूब गया है. जिसके बाद उसके साथियों ने कहां की इस बारे में किसी को बताया तो तुमको हमलोग मा’र देंगे. इसलिए वह कुछ नहीं बता रहा था. पुलिस ने उसका बयान दर्ज कर लिया है. साथ ही कटेया थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि किसी कारणवश बच्चों ने इसकी जानकारी लोगों को नहीं दी. इस मामले में वो कुछ बता नहीं रहे है. मृतक के गांव के कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

तो इस तरह ये पुष्टि की जा सकती है कि इस मामले की शुरूआती रिपोर्ट में कहीं भी मस्जिद, ब’लि या सांप्रदायि’क ऐंगल नहीं दिखता है. इस तरह ऑप इंडिया सहित कुछ अन्य वेबसाइट्स ने इस पूरे मामले को सांप्रदायि’क रंग देने की कोशिश की. पीड़ित के परिवार ने ही इस बात से इन्कार किया कि उनकी मुसलमानों से किसी तरह की रंजि’श थी।

न ही उन्होंने पुलिस को दी अपनी लिखित शिकायत में मस्जिद या बलि का ज़िक्र तक किया. मस्जिद और मस्जिद में बलि देने का ज़िक्र पहली बार मृतक का शव मिलने के 40 दिन बाद ऑप इंडिया के आर्टिकल में हुआ. और यहां से मामले ने साम्प्रादायि’क मोड़ लेते हुए तूल पकड़ लिया और सोशल मीडिया पर छा गया. फ़िलहाल ये केस सीआईडी को सौंपा गया है और जांच चल रही है. ‘ऑप इंडिया’ और ‘ख़बर तक’ पर FIR दर्ज हो चुकी है।