झूठी खबर फैलाते पकड़ा गया जी न्यूज, पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने बताया बकवास

कोरोना वायरस की बीमारी तो आज है, कल खत्म हो जाएगी लेकिन देश की सबसे बड़ी बीमारी झूठी मीडिया बनती जा रही है. वैसे तो अधिकांश न्यूज चैनल अफवाह फैलाने की मशीन बन चुके हैं लेकिन इनमें से भी कुछ चैनल ऐसे हैं जिन्होंने ऐसा लगता है कि देश को सांप्रदायिकता की आग में झुलसाने की सुपारी ले रखी है.

इस बार तो हद ही हो गई. एक वर्ग विशेष के खिलाफ फर्जी खबरें दिखाने के लिए कुख्यात जी मीडिया ने कुछ ऐसी झूठी खबरें प्रसारित कर दी, जिसका खंडन करने के लिए स्वयं पुलिस और अस्पताल प्रशासन को आगे आना पड़ गया.

हम आपको आगे इसका पूरा विवरण देंगे लेकिन एक आग्रह है, आप सभी पाठकों से कि अगर आपको अपने देश से प्यार है, अगर आप हिंदुस्तान रुपी बगीचे को फलते फूलते और खिलते देखना चाहते हैं तो इन न्यूज चैनलों की खबरों पर यकीन कर कोई भी विचार बनाना बंद कर दें अन्यथा देश की बर्बादी के जिम्मेवार आप भी होंगे.

जी मीडिया का झूठ

जी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड ने एक खबर प्रसारित की जिसमेंं यह बताया गया कि यूपी के फिरोजाबाद में तबलीगी जमाती कोरोना पॉजिटिव पाया गया और जब उसे लेने मेडिकल टीम पहुंची तो उस पर लोगों ने पथराव किया. अब इस खबर का आना था कि धड़ाधड़ इसे शेयर और रिट्वीट मिलना शुरु हो गया. लोगों ने एक वर्ग विशेष के खिलाफ जहर उगलना शुरु कर दिया. माहौल को फसादी बनाने की कवायद शुरु हो गई.

पुलिस ने किया खंडन

सराहना करनी होगी फिरोजाबाद पुलिस की. जिसने मामले के सामने आते ही तत्काल इसका खंडन किया. फिरोजाबाद पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से इस खबर को यूपी पुलिस और जी यूपी को टैग करते हुए लिखा कि आपके चैनल द्वारा झूठी और इस तरह की भ्रामक खबर फैलाई जा रही है. पूरे फिरोजाबाद जिले में किसी भी मेडिकल टीम और एंबुलेंस पर किसी तरह का पथराव नहीं हुआ है. पुलिस ने जी मीडिया के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आप अपने इस खबर को तत्काल डिलीट करें.

दूसरी फर्जी खबर छत्तीसगढ़ की

जी मीडिया के ही जी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ ने खबर दिखाई कि कोरबा से रायपुर लगाए गए कोरोना के एक तबलीगी जमाती संदिग्ध ने एम्स परिसर में जमकर हंगाम किया और डॉक्टर पर थूकने और भागने की कोशिश की. इस खबर की सच्चाई भी थोड़ी ही देर में सामने आ गई जब एम्स प्रशासन ने इसका खंडन कर दिया.

किसी भी मरीज ने डॉक्टर पर नहीं थूका

एम्स प्रशासन ने भी बिना देरी किए ट्वीटर पर सार्वजनिक किया कि कोरबा के नाबालिग कोरोना मरीज ने किसी भी डॉक्टर या मेडिकल कर्मचारी पर थूकने का कोई भी प्रयास नहीं किया बल्कि रोगी पूरी तरह चिकित्सकीय परामर्श का पालन करते हुए निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार दवाई ले रहा है.

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