अब आया गोदी मीडिया का ऊँट यूपी प्रशासन के पहाड़ के नीचे, देखिए

अब आया गोदी मीडिया का ऊँट यूपी प्रशासन के पहाड़ के नीचे, देखिए

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित युवती के साथ हुए सामूहिक दु’ष्क’र्म और फिर उसकी मौ#त की घट’ना ने पुरे देश को हिला कर रख दिया है. पुरे देश में गुस्सा देखने को मिल रहा है, पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. लेकिन पुलिस-प्रशासन लगातार गैं’ग#रे प की बात को गलत करार दे रहा है. वहीं देश भर में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग हो रही है.

वहीं इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है. इतना ही नहीं गांव में विपक्षी नेताओं और मीडिया की एंट्री तक रोक दी गई है. गांव में मीडिया की एं’ट्री होने से रोकने पर मीडिया में काफी आ’क्रो’श नजर आ रहे है. गोदी मीडिया भी अब यूपी पुलिस और सरकार की बुराई करती नजर आ रही है.

इस मामले पर गोदी मीडिया के साथ पुलिस का व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, इसी मामले पर गिरीश मालवीय नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता की कलम से निकले इस तंज भरे लेख को पढिए-

अब आया गोदी मीडिया का ऊँट यूपी प्रशासन के पहाड़ के नीचे……. हाथरस में गाँव के बाहर खड़े खड़े इनको समझ मे आ रहा है कि क्या होती है प्रशासनिक गुंडई.

अब न्यूज़ चैनल के तमाम संवाददाता हाथरस के चंदपा गांव के बाहर कैमरे के सामने नाच नाच कर दिखा रहे हैं और बोल रहे हैं कि हमको अंदर जाकर पी’ड़ि’त परिवार से मिलने नही दिया जा रहा है. प्रशासन का मामूली सा कर्मचारी भी उनको धक्के दे देकर भगा रहा है. एंकर को वे चीख चीख कर बता रहे हैं.

बिके हुए एंकरों…..अब क्या अभिव्यक्ति की आजादी के प्रवचन हमे सुना रहे हो….ये भ’स्मासुर तुमने ही तो पैदा किया है……अब भुगतो
जो तुमने बोया है वही तो का’टोगे न….पिछले 6 सालो से दिन-रात तुम देश मे सांप्र’दायि’कता का जह’र घोलते रहे !

गोदी मीडिया के दलालों ! अब तुमको कही भी आने जाने की स्वतंत्रता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार ओर लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ याद आ रहा है.

एक बार अपने दिल पर हाथ रखो ओर फिर बोलो कि क्या तुम ऐसे ही धकियाए जाने के लायक नही हो? तुमने बबूल के पेड़ बोये है तो अब आम की उम्मीद क्यो कर रहे हो…

साभार- गिरीश मालवीय के फेसबुक वाल से साभार